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Meerut News: निगम की क्षमता 330 कुत्तों की... सार्वजनिक स्थल पर कुत्तों की भरमार

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मेरठ..कंवलजीत..दिल्लीरोड पर घूमते कुत्ते......संवाद - फोटो : संवाद
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मेरठ। शहर में आवारा कुत्तों की भरमार हैं। गली-मोहल्ले और सार्वजनिक स्थल पर बैठे कुत्ते महिला, बच्चे और पुरुषों को हमला कर रहे हैं। जानलेवा रैबीज फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों से लोगों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थल से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश जारी कर दिया है। नगर निगम शेल्टर हाउस में कुत्तों को स्थानांतरित करें। निगम की अनुमानित रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ शहर की सड़क पर करीब 1.50 आवारा कुत्ते हैं।
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परतापुर स्थित शंकरनगर में एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में 130 और हापुड़ रोड स्थित तिरंगा गेट के पास नए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में कुल 200 कुत्तों रखने की क्षमता है। वहां कुत्तों की नसबंदी और उन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाकर वापस कुत्तों को सड़क पर छोड़ने की ही योजना है। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया कि सार्वजनिक स्थल से कुत्तों को हटाया जाए। कई महीने से आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, इसको लेकर निगम गंभीर नहीं है। सार्वजनिक स्थल से कुत्तों को हटाकर कहां पर स्थानांतरित किया जाए, इसकी अभी कोई प्लानिंग निगम के पास नहीं है।

शेल्टर हाउस की योजना का अभाव
सार्वजनिक स्थलों से कुत्तों को हटाकर कहां स्थानांतरित किया जाएगा, इसको लेकर निगम के पास फिलहाल कोई स्पष्ट योजना नहीं है। शेल्टर हाउस बनाने के लिए निगम ने अभी तक कोई ठोस प्लान तैयार नहीं किया है। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उन पर नियंत्रण पाने में विफलता, मेरठ के लिए एक चुनौती है। आमजन की सुरक्षा के प्रति निगम को अपनी कार्यशैली में सुधार करना पड़ेगा।
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रोज 120-130 लोग लगवाते इंजेक्शन
जिला अस्पताल में रोजाना 120-130 एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं। शहर में दस से अधिक शिकायत कुत्तों के काटने की निगम के पास पहुंचती हैं। दिनभर लोग आवारा कुत्तों के आतंक की शिकायत निगम में करते है। निगम सुनवाई नहीं करता। सिफारिश लगाने पर एक-दो जगह निगम अपनी टीम भेजकर आवारा कुत्तों को पकड़ती और फिर नसबंदी व एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाकर वहीं उनको वापस छोड़ देती है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कराया जाएगा। सार्वजनिक स्थल से कुत्तों को हटाकर शेल्टर हाउस पहुंचाने का काम निगम करेगा। फिलहाल निगम के पास कोई शेल्टर हाउस नहीं है, इसे लेकर नगर आयुक्त और उच्च अधिकारियों के साथ बैठकर प्लानिंग बनाई जाएगी।
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डॉ. अमर सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
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