लावड़(मेरठ)। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के प्रतिबंध होने के बाद भी धड़ल्ले से हो रहे इस्तेमाल पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। पशु चिकित्सा प्रभारियों को अभियान चलाने के निर्देश दिए गए है। ताकि प्रतिबंधित इंजेक्शन का उपयोग व बिक्री करने वालों पर कार्रवाई की जा सके।
इंजेक्शन पर लगाया गया था प्रतिबंध
सरकार ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के घातक परिणाम सामने आने पर इंजेक्शन की बिक्री पर 13 जुलाई 2007 को प्रतिबंध लगा दिया था। इसकी ब्रिकी व प्रयोग करने पर सजा का प्रावधान है। फिर भी यह इंजेक्शन धड़ल्ले से बिक रहे हैं। जिनका प्रयोग पशुओं से लेकर फसलों तक में किया जा रहा है। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के उपयोग से न केवल दुधारू पशुओं में इसके घातक परिणाम सामने आए बल्कि मनुष्य से लेकर पक्षियों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ा। पशुओं में बांझपन, मनुष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारी होने के परिणाम सामने आए। जिसके चलते इस इंजेक्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
कार्रवाई के दिए निर्देश
ऑक्सीटोसिन की बिक्री करने व इसका उपयोग करने वाले पशुपालकों, डेयरी संचालकों पर शिकंजा कसने के पशु विभाग के अधिकारियों ने निर्देश दिए है। गंगा यात्रा के बाद पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, औषधि निरीक्षक के साथ मिलकर औचक निरीक्षण किया जाएगा। पशु मेले, प्रदर्शनी, पशुहाटों, पशुपालन शिविरों, पशु पालन गोष्ठियों एवं बांझपन निवारण शिविरों में ऑक्सीटोसिन के बारे में चर्चा करने की बात कही।
औचक निरीक्षण करेंगे
सरकार ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के दुष्प्रभाव को देखते हुए इसे प्रतिबंधित कर दिया था, लेकिन पशुपालक व डेयरी संचालक इसका उपयोग कर रहे है। इससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। गंगा यात्रा के बाद निरीक्षण व उपयोग करने वाले व्यक्तियों पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. अशोक कुमार, प्रभारी पशु चिकित्सालय सकौती