वहीं शहीद को तिरंगे में लिपटा देखकर, बहन और मां की हालत बिगड़ गई, जबकि पत्नी का भी रो-रोकर बुरा हाल था। सेना के अफसर शहीद के पार्थिव शरीर को सैन्य वाहन से लेकर मेजर के घर पहुंचे। इस दौरान शहादत पर हर किसी की आंख नम थी, दुश्मनों के खिलाफ एक आक्रोश था। दोपहर 3:10 बजे पार्थिव शरीर घर पहुंचा, अंतिम दर्शन के बाद घर पर सेना द्वारा अंतिम सलामी देने के बाद 3:35 बजे अंतिम यात्रा सूरजकुंड के लिए शुरू हुई। आगे आगे सेना के अफसर, तिरंगे के साथ सैन्य वाहन, पीछे सैकड़ों वाहनों का काफिला.. जब तक सूरज चांद रहेगा, केतन शर्मा तेरा नाम रहेगा। पाकिस्तान मुर्दाबाद... दुश्मनों को नहीं छोड़ेंगे.. नारे गूंजते रहे।
शाम 5:53 बजे सैन्य सम्मान के बाद शहीद को भावभीन श्रद्वांजलि दी गई। मेजर के पिता रविंद्र शर्मा ने इकलौते बेटे को मुखाग्नि दी तो मौजूद लोगों की आंखों में आंसू बहने लगे। अंतिम विदाई में प्रदेश के गन्ना राज्यमंत्री सुरेश राणा, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, डीएम अनिल ढींगरा, एसएसपी नितिन तिवारी, सेना व पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी और मौजूद रहे।
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