जंबूद्वीप में पूजा अर्चना करतीं परमपूज्य गणिनी ज्ञानमती माताजी व अन्य।
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हस्तिनापुर(मेरठ)। रविवार को जम्बूद्वीप में तीन मूर्ति मंदिर स्थित चिंतामणी भगवान पार्श्वनाथ की श्यामवर्णी प्रतिमा के समक्ष 23 किलो का विशाल लड्डू चढ़ाया गया। जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माता संघ के पावन सान्निध्य में जैनधर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक जल, नरियल पानी, घी, दूध, दही, सर्वोषधि, चंदन, पुष्पवृष्टि, सुगंधित जल से भगवान का अभिषेक किया।
जम्बूद्वीप में तीनमूर्ति मंदिर स्थित चिंतामणी भगवान पार्श्वनाथ की श्यामवर्णी प्रतिमा के समक्ष निर्वाण लड्डू चढ़ाया गया और संस्थान के मंत्री विजय कुमार ने संपूर्ण विश्व में वैश्विक महामारी कोरोना से बचने के लिए महाशांतिधारा की गई। मंत्रों का उच्चारण पीठाधीश स्वस्ति रवींद्रकीर्ति स्वामी के द्वारा किया गया। उसके बाद भगवान नेमिनाथ के जन्म कल्याणक के अवसर पर 108 कलशों से भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा एवं भगवान की प्रतिमा को ऐरावत हाथी पर लेकर बैठे। इस मौके पर सुमेरू पर्वत की पाण्डुक शिला पर 108 कलशों अभिषेक सम्पन्न किया गया। इस अवसर पर गणिनी ज्ञानमती माताजी ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ क्षमा के अवतार थे जिन्होंने दस भावों तक कमठ के उपसर्ग को सहन किया। अर्घ्य समर्पित करने का सौभाग्य सुभाष चंद साहू, कैलाश चंद जैन, लखनऊ, प्रतिष्ठाचार्य विजय कुमार को प्राप्त हुआ। सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य विजय कुमार जैन रश्मि जैन, दिल्ली को प्राप्त हुआ। इस विधान की रचियत्री प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता ने बताया कि ये अत्यंत ही चमत्कारी विधान है जिसके सभी मंत्रों में अत्यंत ही अतिशय एवं चमत्कार है। शाम को भगवान पार्श्वनाथ एवं भगवान नेमिनाथ की 108 दीपकों से आरती संपन्न की गई।