पांचों दोस्ती ने मिलकर टीचर्स सेल्फ केयर टीम बनाई। तय किया गया कि परिषदीय और माध्यमिक विद्यालय के किसी शिक्षक की असमय मौत हो जाती है तो टीम उसके परिवार की आर्थिक मदद करेगी।
शिक्षकों को सिर्फ 100-100 रुपये सहयोग राशि देने का प्रस्ताव रखा गया। शुरूआत की तो कोरोना संक्रमण काल आ गया, जिससे टीम ने शिक्षकों की खूब मदद की। सितंबर 2020 से अब तक 11 करोड़ सात लाख रुपये एकत्र कर पीड़ित परिवारों को दे चुके हैं। धनराशि सीधे पीड़ितों के खाते मे ही जाती है।
इस तरह करते हैं मदद
टीम के सदस्य पहले पीड़ित परिवार का पूरा ब्योरा जुटाते हैं। तस्दीक हो जाने के बाद मोबाइल ग्रुप और टीम की वेबसाइट पर पीड़ित परिवार का खाता नंबर शेयर किया जाता है। ग्रुप से जुड़े 26 हजार शिक्षक सीधे पीड़ित के खाते में ही मदद पहुंचाते हैं, जिनकी पूरा विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है। करीब 11 दिन तक मदद का सिलसिला चलता है।
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केस-1
सिद्धार्थनगर जिले में कोरोना संक्रमण काल में शिक्षक अश्वनी तिवारी और उनकी पत्नी का निधन हो गया। परिवार में दो मासूम बेटियां थी। टीम ने दोनों बच्चिं के लिए 21 लाख रुपये एकत्र किए।
केस-2
ग्राम पंचायत चुनाव में ड्यूटी पर गए शिक्षक मोहम्मद साबिर कोरोना संक्रमित हुए और तीन दिन में ही इंतकाल हो गया। जिस वक्त हर तरफ मारामारी मची हुई थी, तभी टीम ने परिवार को 19 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की।
केस-3
प्रतापगढ़ के शिक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी का असमय निधन हुआ। टीम ने उनकी पत्नी को 23 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। परिवार के सदस्य को नौकरी दिलाई।