कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बैंक बोर्ड की बैठक बुलाई गई। बोर्ड सदस्यों के सामने यह मामला रखा गया। घोटाले को बैंक की विश्वसनीयता का सवाल बताते हुए बोर्ड अधिकारियों ने एक राय होकर घोटाले में शामिल सभी आरोपियों को निलंबित कर दिया है। बैठक में बोर्ड अध्यक्ष दिनेश कुमार, सचिव अनूप कुमार, संदीप कुमार, शांति देवी, सुनीता देवी, नितिन मौर्य, सिद्धार्थ कुमार, मनोज कुमार, चमन सिंह, प्रेमपाल सिंह, अवनीश कुमार, जयवीर राठी, आंचल भारती, अभिनव कुमार आदि मौजूद रहे।
इनके खिलाफ हुई कार्रवाई
शाखा प्रबंधक योगेंद्रपाल सिंह, नीरज कुमार शर्मा, राज कुमार, रविराज सिंह, राजेंद्र कुमार (घोटाले के समय कैशियर), अपूर्व दीक्षित, रोहित कुमार तथा लिपिक/कैशियर अवधेश कुमार, महेंद्र सिंह, जयचंद्र, आशीष कुमार, आशुतोष कौशिक को निलंबित किया गया है। जिला सहकारी बैंक में हुआ यह घोटाला 2014 में पकड़ में आ गया था। लेकिन तब बैंक के बोर्ड ने घोटाले को दबा दिया था। कुछ महीनों पहले इसकी शिकायत लोकायुक्त से की गई थी। लोकायुक्त के आदेश के बाद ही घोटाले में जांच शुरू कर घोटाले को पकड़ा गया।
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