सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करने के गंभीर मामले थे। आरपी सिंह के बैंक अकाउंट तक के साक्ष्य इंकम टैक्स विभाग को दिए गए थे। राजभवन ने शिकायतों के मामले में आरपी सिंह को दोषी मानते हुए 27 जून 2005 को बर्खास्त कर दिया था।
बर्खास्तगी के खिलाफ आरपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन कोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया। आरपी सिंह के खिलाफ इन तमाम मामलों में विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। लेकिन इतने सालों बाद भी जांच का कुछ नहीं हुआ।
सरकार में बैठे लोगों ने मूंद ली आंखें
इतने गंभीर भ्रष्टाचार के मामले होने के बाद भी सरकार ने आंखें मूंद ली। उनको फिर से कुलपति बना दिया गया। सितंबर 2020 में राजस्थान विजिलेंस ने उनको कुलपति आवास से ही 2.20 लाख रुपये की घूस लेने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
विजिलेंस अब उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटा रही है। मेरठ से भी सीसीएसयू और एडवोकेट संदीप पहल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि मांगी गई सभी जानकारियों के बारे में साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।