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हुई कार्रवाई : सीसीएसयू के बर्खास्त कुलपति आरपी सिंह के खिलाफ मिले पुख्ता सुबूत, पढ़ें- आखिर क्या था पूरा मामला

Tue, 29 Jun 2021 09:17 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

अजमेर की महर्षि दयानंद सरस्वती विवि में सितंबर में घूसखोरी के आरोप में विजिलेंस टीम ने कुलपति को गिरफ्तार किया था। डॉ. संदीप पहल की शिकायत पर साल 2005 में राज्यपाल ने इन्हें बर्खास्त किया था।
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सीसीएसयू फाइल फोटो
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विस्तार
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व बर्खास्त कुलपति प्रो. आरपी सिंह के खिलाफ जांच कर रही राजस्थान विजिलेंस सीसीएसयू से भी सुबूत जुटा रही है। विजिलेंस की तरफ से विवि से 41 बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है। इस बारे में विजिलेंस सच संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप पहल से भी सुबूत जुटा रही है। 

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सितंबर 2020 में राजस्थान विजिलेंस ने 2.20 लाख रुपये की घूस लेने के मामले में अजमेर की महर्षि दयानंद सरस्वती यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आरपी सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे पहले भ्रष्टाचार के ही मामले में प्रो. आरपी सिंह को 27 जून 2005 को सीसीएसयू के कुलपति पद से बर्खास्त किया गया था। 

सीसीएसयू में दो मार्च 2003 को प्रो. आरपी सिंह ने कुलपति के रूप में चार्ज संभाला था। दो साल के उनके कार्यकाल के दौरान सच संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट डॉ. संदीप पहल ने दर्जनों ममलों में राजभवन शिकायत की थी। इनमें घूस लेकर डेढ़ सौ से ज्यादा बीएड एवं दूसरे सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों को गलत तरह से मान्यता देना, भवनों के ठेकों में भारी घपला, नियुक्तियों में अनियमितताएं, हुईं।

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सीपीएमटी की प्रवेश परीक्षा में अपने चहेते शिक्षक को एडवांस में एक करोड़ 40 लाख रुपये का पेमेंट करने के गंभीर मामले थे। आरपी सिंह के बैंक अकाउंट तक के साक्ष्य इंकम टैक्स विभाग को दिए गए थे। राजभवन ने शिकायतों के मामले में आरपी सिंह को दोषी मानते हुए 27 जून 2005 को बर्खास्त कर दिया था।

बर्खास्तगी के खिलाफ आरपी सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी लेकिन कोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया। आरपी सिंह के खिलाफ इन तमाम मामलों में विजिलेंस की तरफ से मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। लेकिन इतने सालों बाद भी जांच का कुछ नहीं हुआ। 

सरकार में बैठे लोगों ने मूंद ली आंखें 
इतने गंभीर भ्रष्टाचार के मामले होने के बाद भी सरकार ने आंखें मूंद ली। उनको फिर से कुलपति बना दिया गया। सितंबर 2020 में राजस्थान विजिलेंस ने उनको कुलपति आवास से ही 2.20 लाख रुपये की घूस लेने के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

विजिलेंस अब उनके खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटा रही है। मेरठ से भी सीसीएसयू और एडवोकेट संदीप पहल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि मांगी गई सभी जानकारियों के बारे में साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
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