भोला गांव निवासी सोहनबीरी रोहटा रोड स्थित नारायण गार्डन कॉलोनी में अपनी बेटी निशा के घर आई थी। आठ जनवरी को नकाबपोश दो आरोपियों ने सोहनबीरी की हत्या कर दी थी।
भोला गांव की पूर्व प्रधान सोहनबीरी की हत्या उधार के 70 हजार रुपये चुकाने के लिए हरविंद्र मलिक ने बेटे अनुज के साथ मिलकर की थी। सोहनबीरी के तानों से क्षुब्ध होकर दामाद दीपक ने अपने भाई संदीप उर्फ टोनी के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। शुक्रवार सुबह कंकरखेड़ा पुलिस और स्वाट टीम के साथ मुठभेड़ में अनुज पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने उसके पिता हरविंद्र और दीपक व संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने चारों आरोपियों का चालान कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि जानी थाना क्षेत्र के भोला गांव निवासी सोहनबीरी (50) नए साल पर रोहटा रोड स्थित नारायण गार्डन कॉलोनी में अपनी बेटी निशा के घर आई हुई थी। आठ जनवरी की दोपहर नकाबपोश दो आरोपियों ने गोली व चाकू मारकर सोहनबीरी की हत्या कर दी थी। पुलिस ने दामाद दीपक सहित तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। शुक्रवार को पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें से अनुज को पुलिस ने पैर में गोली मारी। अनुज ने बताया कि दीपक और संदीप की उस पर 70 हजार रुपये की उधारी थी। उधारी चुकाने के लिए पिता हरविंद्र के साथ मिलकर सोहनबीरी की हत्या करना स्वीकार किया।
दामाद ने कहा 70 हजार दो या सास को मार डालो
पुलिस पूछताछ में दीपक ने बताया कि उसकी सास उसे काफी समय से प्रताड़ित कर रही थी। अकसर उसे ताने मारकर जलील करती थी। जेल भिजवाने की धमकी देती थी। इसकी वजह से उसका अपनी पत्नी से भी विवाद रहने लगा था। अपना घर छोड़कर उन्हें गाजियाबाद के पतला गांव में रहना पड़ रहा था। समझौते के सभी प्रयास भी विफल हो गए थे। दीपक और संदीप ने हरविंद्र को कहा था कि उधार लिए 70 हजार रुपये वापस करो या फिर सोहनबीरी की हत्या कर दो। रुपये न होने के कारण पिता-पुत्र हत्या करने को तैयार हो गए। पकड़े जाने पर मुकदमे का खर्च उठाने का आश्वासन भी दोनों भाइयों ने दिया था। सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की सहायता से पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
दीपक ने पुलिस को कर दिया था गुमराह
सोहनबीरी के बेटे विक्रांत की तहरीर पर पुलिस ने दामाद दीपक, सौदान व आदर्श गुप्ता के खिलाफ हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज किया था। इसमें उसने बताया था कि बड़े भाई निशांत का लगभग दो करोड़ रुपये को लेकर सौदान से विवाद चल रहा था। पुलिस ने दीपक व सौदान को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया था। दीपक ने पुलिस को गुमराह कर दिया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपी को छोड़ दिया था।
20 दिन पहले की थी मकान की रेकी
पुलिस पूछताछ में अनुज मलिक ने बताया कि हत्या से 20 दिन पूर्व वह बाइक पर सवार होकर दीपक के साथ रोहटा रोड पहुंचा था। यहां दीपक के साथ उसने मकान की रेकी की थी। इस दौरान दीपक ने अनुज को बताया था कि मकान में प्रथम तल पर किराएदार रहते हैं। पहली मंजिल पर निशा रहती है। जिसके बाद दोनों ने पूरे दिन बाइक से चक्कर लगाकर घर के सदस्यों का बाहर निकलने का समय भी नोट किया था। 8 जनवरी की दोपहर किराएदार के घर से निकलने के बाद पिता-पुत्र ने घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद अनुज ने राह चलते व्यक्ति से मोबाइल मांगकर संदीप को कॉल कर काम पूरा होने की जानकारी दी थी।
हापुड़ में दिखी बाइक की लगाई नंबर प्लेट
एसपी सिटी के मुताबिक पुलिस पूछताछ में अनुज ने बताया कि घटना से तीन दिन पूर्व उसकी भैंस बीमार हो गई थी। इसके बाद वह हापुड़ में भैंस की दवाई लेने के लिए गया था। जहां उसने अपने जैसी एक बाइक खड़ी देखी थी। इस बाइक का नंबर उसने नोट कर लिया था। हत्या से पहले उसने अपनी नंबर प्लेट को हटाकर फर्जी नंबर प्लेट बाइक पर लगा ली थी। हरविंद्र पर पूर्व में किठौर थाने में एक हत्या का मुकदमा दर्ज है। हरविंद्र ने ही घटना की पटकथा तैयार की थी।