उप्र सरकार स्मार्ट सिटी की सूची को दबाए बैठी है। मेरठ की फाइल नगर विकास मंत्रालय में अटकी हुई है। पांच दिन से फाइल पर किसी ने संज्ञान तक नहीं लिया है। राज्य सरकार की ओर से शनिवार को स्मार्ट शहरों की सूची केंद्र को भेजी जा सकती है।
स्मार्ट सिटी का पहला हकदार मेरठ है। इसमें चाहे नगर निगम की आय के संसाधन हों, या फिर ऐतिहासिक, शैक्षिक, चिकित्सा के लिए विख्यात शहर। मेरठ की उपलब्धियों को केंद्र या राज्य कोई सरकार भी नजरअंदाज नहीं कर सकती है। क्योंकि अब शहर वह उपलब्धियां भी उजागर हो चुकी हैं जो आम जनता की जानकारी से दूर थीं।
क्रांतिधरा के लिए पूरा विश्व मेरठ को सलाम करता है। स्मार्ट सिटी लेने के लिए मेरठ की जनता आंदोलन कर रही है। 21 सितंबर को लखनऊ में स्मार्ट सिटी को लेकर बैठक हुई थी। इसमें महापौर हरिकांत अहलुवालिया और नगरायुक्त उमेश प्रताप ने पैरोकारी की थी।
बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने मेरठ की उपलब्धियों का संज्ञान लेते हुए फाइल उप्र नगर विकास मंत्रालय में भेज दी थी। 23 सितंबर को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी और संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता सहित 11 व्यापारियों का प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिला था।
मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन भी दिया था। उप्र सरकार पांच दिन से फाइल को दबाए बैठी है। नगर विकास मंत्रालय के माध्यम से स्मार्ट सिटी बनाए जाने वाले शहरों के नाम की सूची भारत सरकार को भेजी जानी है। लेकिन अभी तक सूची नहीं भेजी गई है।