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सियासत की हठधर्मिता, तर्क अनसुने, फैसले में फेल

Tue, 22 Sep 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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सियासत ने फिर हठधर्मिता दिखाते हुए क्रांतिधरा के ठोस तर्कों को सिरे से नजरअंदाज कर दिया। इसका अहसास तो था, लेकिन ऐसी बेरुखी की उम्मीद नहीं थी। सोमवार को लखनऊ में बुलाई गई बैठक में मेरठ को स्मार्ट सिटी की सौगात मिलने की उम्मीद थी। अफसरों ने 45 मिनट तक तर्क सुने, दबी जुबान से उन्हें उचित बताया और एक मिनट में ही फैसला कर लिया कि केंद्र को मेरठ और रायबरेली दोनों शहरों का नाम स्मार्ट सिटी के लिए भेजा जाएगा।
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यही नहीं, मुख्य सचिव ने भाजपाइयों के सामने यह भी प्रस्ताव रख दिया कि केंद्र से 13 नहीं 14 शहरों को स्मार्ट सिटी की मंजूरी दिला दो। यानी रायबरेली के लिए सरकार कुछ भी कर सकती है। लखनऊ की यह बैठक महज औपचारिक थी। सीधे-सीधे यह भी कहा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश सरकार की मेरठ के प्रति मंशा ही साफ नहीं है। वह नहीं चाहती कि मेरठ स्मार्ट सिटी बने। यूपी सरकार के इस निर्णय से जहां इस ऐतिहासिक शहर के साथ मजाक हुआ है, वहीं लाखों लोगों को एक बार फिर झटका लगा है।

पहले दिन से ही सियासत
29 जुलाई को उप्र के 15 शहरों को स्मार्ट सिटी मिशन में प्रजेंटेशन के लिए लखनऊ में बुलाया था। जिसमें मेरठ भी शामिल था। केन्द्र सरकार के मुताबिक उप्र के 13 शहर स्मार्ट बनने हैं। प्रजेंटेशन में पहले दिन मेरठ 13वें स्थान पर रहा था। लेकिन रातोंरात मेरठ केे साथ राजनीति शुरू हो गई। रायबरेली को 13ए और मेरठ को 13 बी स्थान दिया गया। उसी दिन से मेरठ के सांसद, महापौर, विधायक और जनता तर्क के साथ मेरठ को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल कराने की मांग करती चली आ रही है। पिछले महीने उप्र सरकार ने स्मार्ट सिटी की सूची में 13 नहीं बल्कि 14 शहर यानी मेरठ और रायबरेली का नाम भी केंद्र सरकार को भेज दिए।
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अब हठधर्मिता ही दिखा दी
भाजपाइयों के दबाव बनाने पर केंद्र ने उप्र सरकार को मेरठ और रायबरेली में से किसी एक शहर के नाम पर मोहर लगाकर सूची वापस करने के निर्देश दिए थे। जिस पर सोमवार को लखनऊ में उप्र सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में बैठक बुलायी गई। 45 मिनट चली बैठक में महापौर मेरठ हरिकांत अहलूवालिया, नगरायुक्त उमेश प्रताप ने शहर की खासियत और उसकी महत्ता के आधार पर स्मार्ट सिटी में शामिल किए जाने की प्रबल दावेदारी की। मुख्य सचिव ने मेरठ की इस प्रबल दावेदारी के साथ पक्ष में रखे गए तर्क सुने और दबी जुबान में तर्क उचित बताए।

लेकिन किया वहीं, जिसका अंदाजा था। यानी मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि उप्र सरकार की तरफ से स्मार्ट सिटी के लिए मेरठ और रायबरेली दोनों शहरों का नाम केंद्र को भेजा जा रहा है। प्रमुख सचिव के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि सोमवार को बुलाई गई बैठक मात्र औपचारिकता थी। उप्र सरकार मेरठ के पक्ष में नहीं है। अगर उप्र सरकार मेरठ के पक्ष में होती तो इतने तर्क दिए जाने के बाद जरूर अकेले मेरठ का नाम ही स्मार्ट सिटी के 13वें शहर के रूप में केंद्र सरकार को भेजती। यह तब है जबकि बैठक के दौरान रायबरेली के अधिकारी और जनप्रतिनिधि भली प्रकार अपने तर्क देने में भी कामयाब नहीं हो सके।

बरकरार है भाजपा का सरकार पर दबाव
मेरठ। स्मार्ट शहर विकसित करने को मेरठ का चयन किए जाने के लिए भाजपा ने दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि भाजपाइयों के दबाव का जादू उप्र सरकार पर चलता नजर नहीं आया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की अगुवाई में सोमवार को मेरठ कैंट के विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, मेरठ दक्षिण के विधायक रवीन्द्र भड़ाना और महापौर हरिकांत अहलूवालिया मुख्य सचिव आलोक रंजन से मिले। उन्होंने बिंदुवार विषयों को रखते हुए मेरठ को स्मार्ट सिटी के चयनित शहरों की सूची में शामिल करने का मुख्य सचिव पर दबाव बनाया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि स्मार्ट सिटी चयन के लिए हुई बैठक के एजेंडे में क्रम संख्या 13 पर मेरठ और क्रम संख्या 14 पर रायबरेली ने 75-75 अंक प्राप्त किए थे। इसमें उल्लेख किया गया है कि महानगर और मंडल मुख्यालय होने तथा नगर निगम होने के कारण स्मार्ट सिटी योजना के क्रियान्वयन के लिए मेरठ में रायबरेली की अपेक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर अधिक है। यह भी उल्लेख है कि मेरठ जेनएनएनयूआरएम का भाग है। भाजपाइयों की इतनी मेहनत मशक्कत का भी उप्र सरकार पर कोई खास असर नहीं दिखा। वही हुआ, जिसका पहले से ही अंदाजा लगाया जा रहा था।

ये प्रस्तुत किया रिकॉर्ड
भाजपा नेताओं ने कहा कि संलग्नक-1 में क्रम संख्या 13 पर मेरठ और क्रम संख्या 14 पर रायबरेली दर्ज है। संलग्नक-2 में 13 ए पर रायबरेली और 13 बी पर मेरठ को दर्शाया गया है। यदि 13 ए और बी अंकित करना था तो 13 ए पर मेरठ और 13 बी पर रायबरेली होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि राज्यस्तरीय बैठक के बाद मुख्य सचिव के कार्यालय से 29 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति में रायबरेली का नाम ही नहीं है, मेरठ का है।

इससे पहली नजर में ऐसा लग रहा है कि मेरठ के साथ अन्याय हुआ है, रायबरेली का नाम कहां से आ गया। उन्होंने कहा कि जेएनएनयूआरएम में मेरठ नगर निगम को शून्य अंक दिए गए हैं जबकि इस योजना की पूर्णता की अर्हता में नाकामी के लिए नगर निगम जिम्मेदार नहीं है। इस योजना का पैसा भारत सरकार का है और इस पर राज्य सरकार का नियंत्रण है। इस योजना में जल आपूर्ति में 97 फीसदी, सीवर में 80 फीसदी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में शून्य और सिटी बस में सौ फीसदी पूर्णता है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना में तात्कालिक नगर आयुक्त और ए टू जेड कंपनी का झगड़ा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रथम स्वाधीनता संग्राम का केंद्र होने के नाते भी मेरठ की तुलना में रायबरेली पर विचार करना उचित नहीं है।

लिपिकीय त्रुटि से मिले थे 5 अंक कम
महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने 80 के स्थान पर 75 अंक मेरठ को दिए जाने के लिए जहां लिपिकीय त्रुटि बतायी। वहीं, नगर विकास विभाग उप्र को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि जेएनएनयूआरएम योजना के तहत शहर को मिलने वाले गंगाजल की सप्लाई इसलिए शुरू नहीं हो पायी, क्योंकि नगर विकास विभाग ने वर्ष 2012 में 50 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को उपलब्ध ही नहीं कराए थे। ऐसे में योजना की नाकामी के लिए नगर निगम कहां जिम्मेदार है। जेएनएनयूआरएम योजना की प्रगति में मेरठ को लिए शून्य अंक दिए गए। उन्होंने कहा कि आकलन संबंधी प्रपत्र में लिपिकीय त्रुटि दुरुस्त करके मेरठ को स्वत: पांच अंक मिल सकते हैं।

मुख्य सचिव बोले, 14 शहरों को बनाओ स्मार्ट
गए थे नमाज पढ़ने, रोजे गले पड़ गए। यह कहावत सोमवार को लखनऊ में उप्र सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, विधायक और महापौर से वार्ता के दौरान चरितार्थ हो गई। भाजपाइयों ने मेरठ को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने का दबाव क्या बनाया कि मुख्य सचिव ने भाजपाइयों के सामने केंद्र सरकार से उप्र के 14 शहरों को स्मार्ट सिटी बनवाने का प्रस्ताव रख दिया। कैंट विधायक सत्यप्रकाश के अनुसार मुख्य सचिव के इस प्रस्ताव को भाजपाइयों ने स्वीकार तो कर लिया, लेकिन पहले मेरठ को स्मार्ट सिटी की सूची में 13वें स्थान घोषित करने की मांग रख दी। जिस पर मुख्य सचिव ने भाजपा के मेरठ से सांसद, विधायक और महापौर की गिनती सुनानी शुरू कर दी। साथ ही केंद्र में भाजपा की सरकार का हवाला दिया।  
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ये रखे महापौर ने बैठक में तर्क
- मेरठ 1857 की क्रांति धरा है।
- महाभारत-रामायण कालीन धरोहर है।
- स्पोर्ट्स गुड्स सिटी है।
- विश्वस्तरीय गोल्ड सिटी है।
- उच्चस्तरीय शिक्षण संस्थान, मेडिकल कॉलेज हैं,
- मेरठ का कैंची उद्योग, हैंडलूम उद्योग विश्वविख्यात है।
- मेट्रो रेल योजना और फ्रेट कॉरिडोर।
- हवाई अड्डे की स्थापना की कार्यवाही।
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