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क्रांतिधरा के ब्रह्मास्त्र से देंगे स्मार्ट सिटी का इम्तिहान

Fri, 18 Sep 2015 03:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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तरकश के कई तीर चलने के बाद तैयारी अब ब्रह्मास्त्र की है। क्रांतिधरा को स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में उसके काम उसी का गौरवशाली इतिहास, विशेषताएं और विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ना काम आएगा।
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21 सितंबर को लखनऊ में इसके लिए अहम बैठक है, जिसमें मेरठ और रायबरेली के बीच स्मार्ट सिटी का फैसला होगा। सियासत के केंद्र बिंदु मेरठ के तरकश में व्यावसायिक, शैक्षिक, ऐतिहासिक और डेवलेपमेंट से अभिमंत्रित कई तीर हैं। इनमें से ही निकला कोई ब्रह्मस्त्र ही स्मार्ट सिटी दिलाएगा। पता चलेगा कि मेरठ की धरती क्यों और कैसे रायबरेली से काफी बेहतर है, और स्मार्ट सिटी की वास्तविक हकदार है।
स्मार्ट सिटी के चयन को लेकर होने

वाली इस बैठक में साफ हो जाएगा कि मेरठ और रायबरेली में से किसे स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा। इस बैठक की तैयारियों को लेकर महापौर तथा नगरायुक्त अपने स्तर से पूरी तैयारी कर रहे हैं। बैठक में उन्हें इसका प्रजेंटेशन करना होगा। यह बताना होगा कि मेरठ को क्यों स्मार्ट बनाया जाए। इस बाबत पूरी तैयारी यह है कि मेरठ की खासियतों को गिनाया जाएगा। वे खासियत जिनके दम पर मेरठ की पहचान है। चाहे वे किसी भी क्षेत्र में हों, उन्हीं का ब्यौरा वहां पेश कर अपना दावा किया जाएगा। इतिहास से लेकर राजनीति तक, शिक्षा से लेकर व्यवसाय तक, चिकित्सा से लेकर विकास के ऐसे तमाम क्षेत्रों तक, जिनके बल पर मेरठ देश भर में प्रतिनिधित्व करता है। ये सब प्वाइंट बैठक में पेश किए जाएंगे। नगरायुक्त उमेश प्रताप इस बाबत पूरा प्लान तैयार कर रहे हैं।
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इतिहास : प्रजेंटेशन में मेरठ के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा। सबसे अहम तथ्य यह है कि मेरठ से ही देश की आजादी के लिए पहली क्रांति का सूत्रपात हुआ। क्रांति के इस शहर को तो स्मार्ट होना ही चाहिए। इसी को आधार बनाकर इतिहास की तमाम घटनाआें एवं विशेषताओं को एक सूत्र में पिरोकर पेश किया जाएगा । मुगलिया सल्तनत के तमाम सशक्त हस्ताक्षर आज भी मेरठ में हैं। ऐसे में मेरठ का दावा बेहद मजबूत है।
शिक्षा  एवं चिकित्सा : मेरठ एजूकेशन कर हब है। यहां दो सरकारी विश्वविद्यालय, दो-दो प्राइवेट विश्वविद्यालय हैं। एक सरकारी और एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज। कई सौ नर्सिंग होम, निजी अस्पताल है। 60 से अधिक व्यावसायिक शिक्षण संस्थान हैं। वेस्ट यूपी में मेरठ का शिक्षा एवं चिकित्सा में बड़ा नाम है।
राजनीति : वेस्ट यूपी की राजनीति का केन्द्र बिंदु ही मेरठ है। केंद्र सरकार तो इस बात को बखूबी समझती ही है, प्रदेश सरकार भी इसे बेहतर तरीके से जानती है। यही कारण है कि यहां सपा सरकार ने एक नहीं, नौ लाल बत्तियां दे रखी हैं। नेताओं की पूरी फौज यहां है। राजनीति में प्रधानमंत्री पद तक का सफर तय करने वाले चौधरी चरण सिंह इसी मेरठ कालेज के छात्र रहे।

व्यवसाय : मेरठ व्यवसाय के दृष्टिकोण से कम नहीं। यहां की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री विश्वविख्यात है। एसजी, एसएस, बीडीएम, स्टैग, भल्ला इंटरनेशनल, नेलको, हंस रबड़ जैसी इंडस्ट्री की पहचान देश भर में है। इसके अलावा वाद्य यंत्र एवं ट्रांसफार्मर, एग्रीकल्चर उत्पाद, कैंची, हैंडलूम, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स आदि यहां का प्रचलित व्यवसाय है। इसके अलावा एशिया की बड़ी सर्राफा मंडी भी मेरठ में है।
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विकास के कदम
मेट्रो ट्रेन : सबसे अहम प्रस्ताव है कि मेरठ मेट्रो सिटी है और यहां मेट्रो ट्रेन चलाने पर काम चल रहा है। कॉरिडोर फाइनल हो चुके हैं। डीपीआर बन चुकी है। मेट्रो सेल का गठन हो चुका है। सरकार हरी झंडी दे चुकी है। प्रदेश सरकार का दावा है कि वर्ष 2020 तक यहां मेट्रो ट्रेन फर्राटा भरेगी। यूपी में केवल पांच शहरों में इस पर काम हो रहा है। कानपुर, आगरा, मेरठ तथा वाराणसी में ही मेट्रो ट्रेन प्रस्तावित है। लखनऊ में तो काम भी शुरू हो चुका है। जिस शहर में मेट्रो जैसी सुविधा जनता को मिलने जा रही हो तो उसका दावा स्मार्ट सिटी के लिए मजबूत साबित होता है।
रैपिड ट्रेन : दिल्ली से मेरठ के बीच रैपिड ट्रेन चलाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी जा चुकी है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में मेरठ को शामिल किया जा चुका है। यहां तक कि स्टेशन भी फाइनल हो चुके हैं। मेट्रो और रैपिड को कनेक्ट करने का प्लान है।
डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर : मेरठ से होकर डेडिकेटिड फ्रेट कॉरिडोर प्रस्तावित है। जमीन का अधिग्रहण इसके लिए किया जा रहा है। इससे मेरठ देश के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों से कनेक्ट हो रहा है। इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य व्यापार को बढ़ावा देना है और मेरठ को इसमें शामिल किया गया है।
आईटी पार्क : मेरठ में आईटी पार्क बनाया जा रहा है। देश भर की बड़ी आईटी कंपनियाें को यहां अपने सेंटर खोलने का न्यौता दिया जाएगा। इससे यहां का युवा यहीं से अपने बेहतर कॅरियर की शुरुआत कर सकेगा। पहले ही साल सात हजार युवाओं को इसका लाभ होने की बात कही जा रही है। इसकी बाउंड्री का काम पूरा हो चुका है।
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राजस्व : जनपद मेरठ का प्रतिवर्ष 22302 लाख रुपये राष्ट्रीय बचत शुद्ध जमा है। इसमें से ज्यादातर भाग मेरठ शहर के हिस्से में आता है।

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