भगवान शिव की पूजा का महीना श्रावण मास आरंभ होने के बाद भी पुष्प कारोबारियों के दिन नहीं बदल रहे हैं। बाजार से देसी-विदेशी गुलाब गायब हैं। मंदिर बंद हैं। पूजन सामग्री की दुकानें हफ्ते में तीन दिन खुलती हैं। मंडी में डिमांड न होने के कारण दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों से माल नहीं आ रहा है।
शहर में चार से पांच व्यापारी ही मेरठ के किसानों से गेंदा और कनेर खरीदकर कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में आम दिनों के मुकाबले दाम भी दोगुने हो गए हैं। घरों के लिए चुनिंदा लोग ही पुष्प खरीदकर ले जा रहे हैं।
भगवान को अर्पित करने के लिए मंदिर समितियों को प्रचुर मात्रा में पुष्प भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। भगवान शिव का श्रृंगार भी गुलाब के स्थान पर अब गेंदा और कनेर से किया जा रहा है। महंगाई बढ़ने के कारण पूर्व के मुकाबले गेंदे और कनेर के रेट भी दोगुने हो गए हैं। फूल माला के साथ बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि की भी उपलब्धता नहीं है। ऐसे में व्यापारियों के पास आय का कोई साधन शेष नहीं रह गया है।
इस सबके पीछे एकमात्र कारण भक्तों के लिए मंदिरों के द्वार नहीं खोले जाना है। मंदिर समितियों के बार-बार आग्रह के बावजूद जिला प्रशासन ने दर्शन के लिए मंदिर खोलने की अनुमति नहीं दी है। शहर के आउटर क्षेत्र के मंदिरों को भी पुलिस मौके पर जाकर बंद करा रही है।