आर्मी की पासिंग आउट परेड से मेरठ के भी कई होनहार लेफ्टिनेंट बनकर बाहर निकले हैं। सचिन वर्मा, शांतनु मोहन और राघवेंद्र सिंह लेफ्टिनेंट बन गए हैं। लेफ्टिनेंट कमीशन मिलने के बाद परेड में इन्होंने भी अपनी टोपी उछाली। तीनों लेफ्टिनेंट के परिवार में जश्न का माहौल है। फैमिली भी परेड के कार्यक्रम का हिस्सा बनी। अपने लाड़लों को अफसर बनता देख आंखों चमक उठी। दिल के अरमान पूरे हो गए। अब ये नौजवान सेना के लिए समर्पित हो गए हैं।
बड़े भाई के नक्शे कदम पर चला सचिन
गंगानगर निवासी विनोद वर्मा के दोनों बेटे सेना में अफसर बन गए हैं। बड़ा बेटा हिमांशु वर्मा चार साल पहले आईएमए परेड से पास आउट हुआ था। हिमांशु इन दिनों गंगटोक में कैप्टन हैं। विद्या नॉलेज पार्क से बीटेक करने के बाद हिमांशु ने सीडीएस क्वालीफाई किया। बड़े भाई की तैयारी और सेलेक्शन के बाद आर्मी की वर्किंग और सुविधा का देखते हुए छोटा भाई सचिन वर्मा ने भी सेना में जाने की ठान ली। सचिन ने 12वीं ट्रांसलेम एकेडमी से की। इसके बाद पूसा यूनिवर्सिटी दिल्ली से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। कुछ समय नौकरी भी की। सेना की सेवा करने का मन बना तो नौकरी छोड़कर तैयारी की। सेल्फ स्टडी से प्रतियोगिता में सफलता हासिल की। सचिन के पिता जर्मनी की एक कंपनी में जॉब करते थे। इन दिनों बिजनेस में हैं। मां हेमा वर्मा छिलोरा स्थित प्राइमरी स्कूल की प्रिंसिपल हैं। विनोद दोनों बेटों की सफलता का श्रेय उनकी मां हेमा को देते हैं। नौकरी के साथ-साथ हेमा ने बेटों की पढ़ाई का भी पूरा ख्याल रखा।
शांतनु ने पूरा किया सपना
रुड़की रोड स्थित गोल्डन एवेन्यू कॉलोनी निवासी एसबीआई में एजीएम के पद पर तैनात सुशील कुमार के बेटे शांतनु मोहन ने लेफ्टिनेंट बनकर सपना पूरा किया है। शांतनु लेफ्टिनेंट बनने से पहले राष्ट्रीय स्तर पर छाए हुए हैं। वह घुड़सवारी के नेशनल चैंपियन हैं। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई इंडियन मिलिट्री कॉलेज देहरादून से की। इसके बाद उनका चयन एनडीए में हुआ। 2015 में पुणे में हुई घुड़सवारी की जूनियर नेशनल चैंपियनशिप वह अपने नाम कर चुके हैं। 2015 में देश का सर्वश्रेष्ठ घुड़सवार होने का अवार्ड मिला। राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी की ओर से खेलते हुए कई पुरस्कार जीते। हाल में आईएमए की टीम की ओर से दिल्ली के आर्मी इक्वेस्ट्रियन सेंटर में आयोजित पोलो प्रतियोगिता भी जीती। जर्नल थिमैया कप पर कब्जा जमाया। शांतनु का सपना एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। पोस्टिंग महाराष्ट्र के अहमदनगर में मिली है।
डॉक्टर का बेटा बना सेना में अधिकारी
भावनपुर सीएचसी पर तैनात डॉक्टर यशपाल सिंह का बेटा राघवेंद्र सिंह भी लेफ्टिनेंट बना है। सेंट थॉमस इंग्लिश मीडियम स्कूल से 2012 में 12वीं करने वाले राघवेंद्र सिंह का स्कूल टाइम से ही सपना सेना में जाने का था। अपनी कड़ी मेहनत के बल पर एनडीए में चयनित हुए। ट्रेनिंग के बाद जब कमीशन मिला तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राघवेंद्र की बड़ी बहन एमटेक कर रही हैं। मूल निवासी सरधना के पास खेड़ा गांव के हैं। फिलहाल परिवार फूलबाग कॉलोनी में रह रहा है। राघवेंद्र अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हैं। पोस्टिंग 16 गढ़वाल रेजीमेंट में मिली है।
बधाई देने वालों का लगा तांता
मोदीपुरम। लेफ्टिनेंट बनने पर शांतनु के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। भाजपा सरधना विधायक संगीत सोम, कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने भी बधाई दी है।