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पाकिस्तानी नवेद और बांग्लादेशी यासीन को चार साल बाद भी ढूंढ नहीं पाई पुलिस, सक्रिय हुई खुफिया टीमें

Sat, 05 Oct 2019 02:16 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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एसपी अजय कुमार शामली
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त्योहारों पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शासन ने प्रदेश में घुसपैठियों को तलाश करने के निर्देश दिए हैं। इसी के मद्देनजर पुलिस और खुफिया टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। मगर, हैरत की बात यह है कि करीब चार साल पहले कैराना से लापता हुए पाकिस्तानी नवेद और थानाभवन से बांग्लादेशी यासीन का पुलिस आज तक पता नहीं लगा सकी है। इसके अलावा शामली समेत आसपास के जनपद में म्यांमार के लोगों के होने का भी खुलासा हो चुका है। इसके चलते जिले में गोपनीय तौर पर घुसपैठियों की तलाश तेज कर दी गई है।

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मां और भाई के साथ कैराना आया था नवेद 
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला जंग सदर निवासी नवेद मई 2015 को अपनी मां रईसा और भाई नदीम के साथ कैराना स्थित रिश्तेदार के यहां 25 दिन के वीजा पर आया था। वीजा अवधि समाप्त होने से पहले 19 मई को नवेद लापता हो गया था। 29 मई को उसकी मां रईसा ने कैराना कोतवाली में नवेद की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। नवेद के लापता होने के बाद मां और भाई ने वीजा अवधि बढ़वाने की मांग की थी, लेकिन अवधि नहीं बढ़ी थी। इसके बाद वीजा अवधि पूरी होने पर रईसा और नदीम पाकिस्तान लौट गए थे। लापता नवेद की खुफिया विभाग, एटीएस और अन्य जांच एजेंसियों ने तलाश शुरू की थी, लेकिन आज तक उसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका। 

थानाभवन में रह रहा था बांग्लादेशी यासीन
कस्बा थानाभवन में कई साल तक रहने वाले यासीन ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाते खुलवा लिए थे। इसके बाद उसने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया था। खुफिया अधिकारियों ने जब उससे जानकारी की तो उसकी भाषा और बोलचाल में वह संदेह के दायरे में आ गया था। पुलिस और खुफिया विभाग उसे पकड़ पाती, लेकिन मई 2015 में वह फरार हो गया था। पुलिस और खुफिया विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी उसका आज तक पता नहीं चल सका है।
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जलालाबाद में पकड़े जा चुके म्यांमार के लोग
28 जुलाई 2019 को कस्बा जलालाबाद में अवैध रूप से रह रहे म्यांमार निवासी सोई कोको उर्फ नोमान अली, साइन कोको उर्फ मोहम्मद रिजवान, विन कोको उर्फ मोहम्मद फुरकान और मदरसे में पढ़ाने वाले रोहिंग्या अब्दुल मजीद को गिरफ्तार किया था। म्यांमार निवासी चारों युवकों की जानकारी पुलिस-प्रशासन को न देने के आरोप में तीन मदरसा संचालकों को भी गिरफ्तार किया था। म्यांमार निवासी चारों युवकों को पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई थी, जिसमें 20 से अधिक म्यांमार के लोगों के शामली और आसपास के जनपद में छिपे होना बताया था। पुलिस ने म्यांमार निवासियों की तलाश में शामली, सहारनपुर समेत कई जिलों में तलाश की थी, लेकिन उनका पता नहीं चल सका था। 

रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी भरी मिली थी चिट्ठी
करीब पांच माह पहले शामली रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर के नाम से डाक से चिट्ठी मिली थी। जैश ए मोहम्मद के एरिया कमांडर मैसूर अहमद के नाम से भेजी गई चिट्ठी में शामली समेत वेस्ट यूपी और दिल्ली के रेलवे स्टेशनों के बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। साथ ही चिट्ठी में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जांच में यह पत्र जालंधर से भेजने की बात सामने आई थी। इस मामले में जीआरपी में मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन आज तक चिट्ठी भेजने वाले का सुराग नहीं लग सका। 

जिले में घुसपैठियों की तलाश के लिए पुलिस टीमें लगाई गई हैं। खुफिया टीमें भी लगी हुई है। इसके साथ ही जिले में यूपी-हरियाणा सीमा के साथ चेकिंग की जा रही है। शहर और कस्बों में भी चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। - अजय कुमार, एसपी।

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