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UP: ईद पर घर आए थे साकिब-अरबाब, यूपी के मॉल थे टारगेट, पाकिस्तानी हैंडलरों से थी सीधी बात; चौंकाने वाले खुलासे

Sat, 04 Apr 2026 10:42 AM IST
Sharukh Khan दिशांत त्रिवेदी, अमर उजाला, मेरठ

सार

यूपी एटीएस की गिरफ्त में आए मेरठ के संदिग्ध आतंकी साकिब उर्फ डेविल और अरबाब दोनों के ईद पर घर आने की जानकारी मिली है। वे पश्चिमी यूपी के मॉल और रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की साजिश रच रहे थे। तीन दिन तक दोनों अपने घर में ही रुके रहे। इस दौरान इन्होंने मेरठ में किसी माल या रेलवे स्टेशन की फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की या नहीं, इसकी पड़ताल में खुफिया विभाग जुट गया है। 
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चार संदिग्ध गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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यूपी एटीएस द्वारा पकड़े गए आतंकी साजिश के संदिग्धों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मास्टरमाइंड साकिब उर्फ डेविल और उसका साथी अरबाब, जो मूल रूप से परीक्षितगढ़ के अगवानपुर निवासी हैं, ईद के मौके पर मेरठ आए थे। 
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तीन दिनों तक वे अपने घर में रुके लेकिन स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिट (एलआईयू) को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इन तीन दिनों के भीतर उन्होंने मेरठ के मॉल, रेलवे स्टेशनों या अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों की रेकी कर फोटो या वीडियो पाकिस्तानी हैंडलरों को तो साझा नहीं किए। 

एसएसपी अविनाश पांडेय के अनुसार, साकिब उर्फ डेविल पिछले आठ वर्षों से हैदराबाद में रहकर नाई की दुकान चला रहा था। अरबाब चार साल पहले गुरुग्राम शिफ्ट हो गया था और वहां वेल्डिंग का काम करता था।
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ये दोनों लंबे समय से पाकिस्तानी हैंडलरों और कट्टरपंथी संगठनों के संपर्क में थे। पूछताछ में सामने आया है कि इनके निशाने पर वेस्ट यूपी के कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान, मॉल और रेलवे स्टेशन थे। ईद के दौरान जब ये घर से निकलते थे, तबके इनके मूवमेंट की सीडीआर के जरिए जांच की जा रही है। 

खुफिया विभाग की टीम ने गोपनीय रूप से इनके परिजनों की कुंडली भी खंगालनी शुरू कर दी है। साकिब पर दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट का मुकदमा होने की वजह से वह लगातार कचहरी में तारीख पर मेरठ आता रहा है। उसने जाल यहां किस स्तर पर बिछाया था, इसकी जांच की जा रही है। 
 

प्रदेश के कई बड़े नेता थे निशाने पर
पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारों पर काम करने वाले मॉड्यूल के निशाने पर टॉप तीन शहर थे। मॉड्यूल पहले इन शहरों में वारदातों को अंजाम देकर दहशत पैदा करता उसके बाद अन्य शहरों को निशाना बनाता। एटीएस की पूछताछ में ये पूरी साजिश खुद आरोपियों ने कबूल की। 

 

प्रदेश के कई बड़े नेता गिरोह के निशाने पर थे। एटीएस को नेताओं के नाम भी आरोपियों ने बताए हैं। इसमें कई नेता अहम पदों पर भी हैं। आरोपियों ने इन नेताओं की पूरी रेकी की थी। अब जब पाकिस्तानी हैंडलर्स इनको जैसे-जैसे आदेश देते वैसे-वैसे ये उसको अंजाम देते। 

 

एटीएस के मुताबिक जो वीडियो आरोपियों ने भेजे उसके एवज में पाकिस्तानी हैंडलर्स ने उनको रकम भी दी। पूरी रकम ऑनलाइन दी गई। आरोपी साकिब ने क्यूआर कोड उनको भेजा था। 

 

उसके जरिये रकम भेजी जाती थी। फिर साकिब रकम का बंटवारा करता था। धीरे-धीरे वह नेटवर्क को बढ़ाने में जुटा था। आरोपियों के मोबाइल में अफगानिस्तान के भी नंबर मिले हैं।

साकिब 2019 में जा चुका है जेल
जांच में यह भी सामने आया कि मास्टरमाइंड साकिब का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। वर्ष 2019 में परीक्षितगढ़ थाने में उसके खिलाफ एक किशोरी ने दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। 

 

इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी और साकिब जेल भी गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद वह हैदराबाद चला गया था, लेकिन कोर्ट की तारीखों पर वह लगातार मेरठ आता रहता था। पुलिस अब कोर्ट से उसके मुकदमे के वर्तमान स्टेटस की जानकारी जुटा रही है।

साकिब पर दर्ज है दुष्कर्म का मुकदमा
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि साकिब 2019 में मेरठ आया था। उसके खिलाफ 2019 में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट का मुकदमा किशोरी ने परीक्षितगढ़ थाने में दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद साकिब को जेल भेज दिया था। वह जमानत पर रिहा होने के बाद फिर से हैदराबाद चला गया था।

 

इंटेलिजेंस खंगाल रही है परिजनों और मददगारों की कुंडली
एटीएस और मेरठ इंटेलिजेंस की टीमें अब गोपनीय रूप से इनके परिजनों और करीबियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि साकिब ने कचहरी आने-जाने के दौरान यहां अपना कोई नया नेटवर्क तो तैयार नहीं कर लिया था। 

साकिब और अरबाब के संपर्क में मेरठ के कौन-कौन से युवक थे इसकी सूची तैयार की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि ग्रेटर नोएडा, अंबाला, गाजियाबाद और हापुड़ से हाल ही में पकड़े गए जासूसों से मिले इनपुट के आधार पर ही एटीएस ने यह बड़ी कार्रवाई की है। 

 

फिलहाल एटीएस और लोकल पुलिस दोनों आरोपियों के मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि साजिश की जड़ें कितनी गहरी हैं। 
 

लखनऊ में धमाके की साजिश नाकाम, चार संदिग्ध गिरफ्तार
यूपी एटीएस ने लखनऊ में बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। चारों आरोपी राजधानी में विस्फोट और आगजनी की साजिश रच रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, चारों आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर व आईएसआई से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में थे।

 

एटीएस के मुताबिक, आरोपियों का सबसे पहला निशाना लखनऊ रेलवे स्टेशन था। सूचना मिलने के बाद टीम ने बृहस्पतिवार को मौके पर पहुंचकर चारों को गिरफ्तार कर लिया और बड़ी घटना होने से पहले साजिश नाकाम कर दी।

 

जांच में सामने आया है कि आरोपी देशभर में रेलवे सिग्नल बॉक्स उड़ाकर ट्रेनों को पटरी से उतारने या आपस में टकराने जैसी घटनाएं कराना चाहते थे। इसके अलावा गैस सिलिंडर से भरे ट्रकों और प्रतिष्ठित संस्थानों में आग लगाकर बड़े स्तर पर नुकसान और अफरातफरी फैलाने की साजिश रच रहे थे। 

 

आरोपी कई नेताओं की भी रेकी कर रहे थे। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार मेरठ (अगवानपुर परीक्षितगढ़) निवासी साकिब उर्फ डेविल इस गिरोह का सरगना है। वह टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और सिग्नल जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये पाकिस्तानी हैंडलरों व कट्टरपंथी संगठनों से संपर्क में था। 

 

उसका साथी अरबाब भी मेरठ (अगवानपुर परीक्षितगढ़) नेटवर्क में सक्रिय था। दोनों ने गौतमबुद्धनगर (छपरौला) के विकास उर्फ रौनक और लोकेश उर्फ पपला को पैसों का लालच देकर अपने साथ जोड़ा। मुख्य आरोपी साकिब नाई का काम करता है।

ये हुई बरामदगी
आरोपियों के पास से ज्वलनशील पदार्थ, सात मोबाइल फोन, पर्चे और आधार कार्ड बरामद किए गए हैं। मामले में भारतीय न्याय संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

 
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पहले भी अंजाम दे चुके थे छोटी घटनाएं
एटीएस की जांच में पता चला है कि आरोपी पहले छोटी आगजनी की घटनाओं को अंजाम दे चुके थे और उनके वीडियो बनाकर विदेशी हैंडलरों को भेजते थे।
 
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