नाले में सीवर का पानी भी बह रहा था, फिर भी उन्हें अंदर सफाई के लिए उतार दिया गया। इस पूरी घटना का वीडियो स्थानीय लोगों ने बनाया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि किस तरह कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा के जहरीले नाले में उतरकर सफाई कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 2013 में बने मैनुअल स्कैवेंजर अधिनियम के तहत हाथ से मैला उठाने और अस्वास्थ्यकर शौचालयों की सफाई पर रोक लगा दी गई थी। इस अधिनियम के उल्लंघन पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
यह भी पढ़ें: आस्था हत्याकांड: डीएनए के मामले में सुनवाई आज, पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका वांछित गौरव, कटे सिर की तलाश जारी
इसके बावजूद इस तरह कर्मचारियों से मैनुअल सफाई कराया जाना कानून और मानवाधिकारों की खुलेआम अनदेखी है। सरकार की ओर से स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियानों के तहत इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।
वहीं, इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने कहा कि नाले की सफाई का ठेका दिया गया है और यह कार्य ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है, न कि नगर निगम द्वारा। उन्होंने कहा कि मैनुअल सफाई कराना गलत है, ठेकेदार को नोटिस दिया जाएगा और उस पर कार्रवाई भी की जाएगी।