उन्होंने कहा कि इस हकीकत से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इस मुकदमे को लेकर अदालत पर फिरकापरस्त ताकतों की और से जबरदस्त दबाव बनाने की कोशिशें हो चुकी हैं और सरकार से अदालती फैसले की जगह कानून बनाने की मांग जोरशोर के साथ की जा रही है।
मदनी ने पीएम मोदी के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने अपने बयान में अदालती फैसले का इंतजार करने की बात जरूर कही है। मगर यह इशारा भी दिया है कि जरूरत हुई तो उनकी हुकूमत मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश ला सकती है। मौलाना मदनी ने कहा कि हमें इस बात का पूरा यकीन है कि अदालत सबूत और गवाहों की बुनियाद पर फैसला देगी आस्था की बुनियाद पर नहीं।
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