मौलाना नजीफ ने कहा कि इस्लाम में पांच अहम इबादतें है उनमें से एक अहम इबादत हज करना भी है इस्लाम में इसकी बड़ी अहमियत है। इस्लाम के अंदर हज करने के लिए कुछ तरीके बताए गए हैं, उसकी कुछ शर्तें भी हैं। उसके मुताबिक ही हज करना चाहिए।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि जो महिलाएं शरीयत के सिद्धांतों और नियमों को अनदेखा कर हज यात्रा पर जातीं हैं उनका हज स्वीकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि बिना मेहरम की हज यात्रा की अनुमति देना सरासर गलत है। इस्लाम में खून के रिश्ते वालों के साथ ही हज यात्रा पर जाने की अनुमति है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/