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रोडवेज के खेल भी निराले, न जमीन न रोकने का आधार..., जनता का पैसा लुटा रहे धुआंधार

Mon, 17 Feb 2020 05:54 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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meerut bus stop - फोटो : अमर उजाला
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रोडवेज के खेल भी निराले हैं। मेरठ में भैसाली बस अड्डे की जमीन का रोडवेज के पास मालिकाना हक नहीं है और बस अड्डा शहर से बाहर जाना तय है। उसे रोकने का कोई ठोस आधार भी नहीं है। लेकिन उसके बावजूद रोडवेज कायाकल्प के नाम पर जनता का पैसा खुलकर लुटा रहा है।
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यही नहीं, रोडवेज की जिस सेंट्रल वर्कशॉप पर रैपिड ट्रेन की वर्कशॉप बनना प्रस्तावित है, वहीं पर डिपो की बिल्डिंग शिफ्ट की जा रही है। सवाल उठता है कि जब भविष्य में बस अड्डा शहर से बाहर जाना ही है तो इतना पैसा क्यों बर्बाद किया जा रहा है।

रोडवेज का भैसाली और सोहराब गेट बस अड्डा शहर के बीच आ चुके हैं। इन अड्डों से संचालित होने वाली हजारों बसों के चलते जहां शहर में जाम लगता है तो वहीं वायु और ध्वनि प्रदूषण का भी स्तर बढ़ रहा है। चार साल से भैसाली और सोहराब बस अड्डा शहर से बाहर करने की कवायद चल रही है।
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महायोजना 2021 में भी बस अड्डे शहर से बाहर जाना प्रस्तावित हैं। यहां पहला नंबर भैसाली अड्डे का है क्योंकि भैसाली बस अड्डे की सेंट्रल वर्कशॉप प्रशासन द्वारा रैपिड रेल के वर्कशॉप के लिए प्रस्तावित भी की जा चुकी है। लेकिन इन सबके बावजूद भी रोडवेज बस अड्डे को बाहर न करने पर अड़ा है। कुल मिलाकर भैसाली बस अड्डा अंगद के पांव की तरह जमा है और प्रशासन उसे हिला तक नहीं पा रहा है।
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हर बार हो जाते हैं लाखों खर्च
खास बात यह है कि बस अड्डा शहर से बाहर करने की अटकलों और इसको लेकर हो रही उठापटक के बीच रोडवेज भैसाली बस अड्डा हर बार लाखों रुपये खर्च देता है। रोडवेज चार साल में कायाकल्प के नाम पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। कुछ दिन पहले ही लाखों रुपये खर्च कर ठीक की गई भैसाली डिपो के एआरएम कार्यालय की बिल्डिंग को अब खाली किया जा रहा है।

अब इस कार्यालय को सेंट्रल वर्कशॉप में शिफ्ट किया जा रहा है। ठीक कराई गई बिल्डिंग को तोड़कर बस प्लेटफार्म बनाने की बात कही जा रही है। सेंट्रल रीजनल वर्कशॉप कर्मचारी संघ ने इसका विरोध करते हुए आरएम को ज्ञापन दे दिया है। संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष गुलशाद अली और क्षेत्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि जब वर्कशॉप, क्षेत्रीय कार्यालय की भूमि पर रैपिड परियोजना आनी है तो यहां इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है। 

-भैसाली अड्डे का क्षेत्रफल, 11671 वर्गमीटर
-1952 से जमीन पर यूपी रोडवेज काबिज
-मेरठ कार्यशाला का क्षेत्रफल                 13430 वर्गमीटर
- सोहराबगेट डिपो की स्थापना वर्ष               1978
-सोहराबगेट बस अड्डे का क्षेत्रफल 4954 वर्गमीटर
- सोहराबगेट कार्यशाला का क्षेत्रफल 12733 वर्गमीटर
- दोनों बस अड्डों से संचालित बसें  करीब 650
- भैसाली अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 50 हजार प्रतिदिन
- सोहराबगेट अड्डे के यात्रियों की संख्या करीब 15 हजार प्रतिदिन
- दोनों बस अड्डों को निगम मुख्यालय द्वारा ‘ए’ श्रेणी में रखा है। 

जमीन प्रभावित नहीं होगी
भैसाली डिपो के एआरएम कार्यालय की बिल्डिंग तोड़कर बस प्लेटफार्म बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके चलते एआरएम ऑफिस को वर्कशॉप में शिफ्ट किया जा रहा है। इस कार्य से रैपिड ट्रेन के वर्कशॉप को दी जाने वाली जमीन प्रभावित नहीं होगी। - नीरज सक्सेना, आरएम मेरठ रीजन 
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