हादसे में फातिमा का चेहरा भी बुरी तरह जख्मी हो गया। शरीर में 194 टांके लगे और वह कोमा में चलीं गईं। आठ बहन-भाइयों में सबसे बड़ी फातिमा के परिजन उम्मीद छोड़ चुके थे। हादसे के बाद उसके दोनों हाथों-पैरों में रॉड डालकर नौ जगह बोल्ट लगाए गए। इसके बाद वो व्हीलचेयर पर आ गईं। दुर्घटना के छह माह बाद फातिमा को होश आया और डेढ़ वर्ष तक बिस्तर पर रहीं।
दिव्यांगता के साथ खेलों में रखा कदम
सड़क हादसे से पहले फातिमा का खेलों से कोई नाता नहीं था। हादसे के बाद वो ऑफिस से निकलते हुए कभी-कभी व्हील चेयर से भामाशाह पार्क (विक्टोरिया पार्क) घूमने जाती थीं। चार जुलाई 2017 को उन्होंने पैरा खेलों में हाथ आजमाया। यहां कोच गौरव त्यागी के निर्देशन में खेलों में शुरूआत की। आज फातिमा आत्मविश्वास से लबरेज हैं और यही उनकी ताकत है। वर्तमान में कोच दीपक यादव से प्रशिक्षण ले रहीं हैं।
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एक ही प्रतियोगिता में जीते तीन गोल्ड मेडल
मार्च 2018 में लखनऊ में आयोजित पैरा स्टेट प्रतियोगिता में फातिमा ने एक साथ तीन गोल्ड मेडल जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में पदक जीता। इसके बाद चंडीगढ़ में पैरा नेशनल में सिल्वर मेडल जीता।
उन्होंने 2018 में बीजिंग में हुई अंतरराष्ट्रीय ग्रैंड प्रिक्स में कांस्य पदक झटका। वो अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर 7 व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3 पदक झटक चुकी हैं। चीन में होने वाले एशियन गेम्स में क्वालीफाई कर चुकी हैं। हालांकि कोरोना के कारण फिलहाल एशियन गेम्स अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। जबकि 6 जून में वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वालीफाई प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने पेरिस जा रहीं हैं।
हमें दिव्यांग खिलाड़ियों पर गर्व
स्टेडियम में दिव्यांग ख़िलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण देने पर ध्यान दिया जा रहा है। खेल विभाग ने दिव्यागों को सामान्य नीति में शामिल भी कर लिया है। हमें इन खिलाड़ियों पर गर्व है। ये लगातार मेहनत कर मुकाम हासिल कर रहे हैं। इनका हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। - गदाधर बारीकी, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी