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रालोद सुप्रीमो अजित सिंह के मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ने पर संशय बरकरार, कहा सद्भावना व भाईचारा अहम

Sat, 19 Jan 2019 10:48 AM IST
Priyesh Mishra राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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रालोद अध्यक्ष अजित सिंह - फोटो : amar ujala
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सपा और बसपा में गठबंधन के बाद सीटों को लेकर रालोद में चल रहे घमासान के बीच पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह पूरी तरह सहज नजर आ रहे हैं। वे न केवल चिरपरिचित अंदाज में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे हैं बल्कि टूटे भाईचारे को फिर से बनाने का आह्वान भी कर रहे हैं। शुक्रवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि मुद्दा गठबंधन में सीटों को लेकर नहीं, बल्कि टूटे भाईचारे को फिर से कायम करने और सांप्रदायिक सद्भावना बनाना ज्यादा अहम है। 

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रालोद में ही नहीं बल्कि तमाम राजनीतिक दलों में इस बात को लेकर चर्चा है कि सपा-बसपा गठबंधन में रालोद के हिस्से कितनी और कौन-कौन सी सीट आ रही हैं। साझा प्रेस कांफ्रेंस में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव द्वारा अन्य दलों के नाम पर दो सीटें छोड़ने और रालोद का नाम नहीं लेने से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी आक्रोश चल रहा है। हालांकि अब रालोद के गठबंधन में रहने की तो तस्वीर साफ हो गई है, लेकिन सीटों को लेकर कशमकश जारी है।

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रालोद चार सीटोें पर अड़ी है तो सपा तीन सीट देने की बात कह रही है। इस बीच पार्टी सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह से मिलने के लिए समर्थकों की भारी भीड़ दिल्ली पहुंचने में लगी है। शुक्रवार को भी सिंह से मिलने के मुजफ्फरनगर दंगे में सर्वाधिक प्रभावित रहे गांव लिसाढ़ के काफी लोग पहुंचे।

गांव लिसाढ़ निवासी सतवीर सिंह और पार्टी नेता डॉ. विक्रांत जावला ने कहा दंगे से खत्म हुए जाट-मुसलिम भाईचारे को रालोद फिर से कायम करने में लगा है। जिन्होंने दंगा कराया आज वे पीड़ितों का हाल भी पूछने नहीं आते हैं। लोग दंगा कराने वालों का खेल समझ चुके हैं। 

सिंह ने अमर उजला से गठबंधन में मिल रही सीटों के सवाल पर कहा कि मुद्दा सीटों का नहीं मुजफ्फरनगर दंगे के बाद टूटे भाईचारे को जोड़ने और सांप्रदायिक सद्भावना कायम करने का है। गठबंधन भाजपा को जमींदोज करने के लिए बना है। वे शुरू से ही भाजपा के खिलाफ बन रहे गठबंधन के पक्षकार रहे हैं। 81 साल की उम्र में भी वे पिछले एक साल से भाईचारा कायम करने में लगे हैं। इसमें लगातार सफलता मिल रही है।

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