वो तो भारत मां का बेटा था, उससे ये अन्याय
अमर उजाला से बातचीत में कैप्टन (रिटायर्ड) पीएल तलवार ने कहा कि मैंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। वो मेरा नहीं, बल्कि भारत मां का बेटा था। जिसने शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और कारगिल युद्ध में देश की माटी की खातिर शहीद हो गया। मुझे नहीं पता था कि शहीद के साथ ऐसा भी अन्याय हो सकता है। जब शहीद का पार्थिव शरीर घर से सूरजकुंड के लिए निकला तो ऐसा सैलाब था कि बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। भाजपा सांसद विनय कटियार एवं सेना के बड़े अफसरों ने 23 जुलाई 2002 को कमिश्नर आवास चौराहे पर शहीद मनोज तलवार की प्रतिमा का अनावरण किया तो मुझे लगा कि कम से कम यहां से आने- जाने वाले शहीद का नाम तो पढ़ सकेंगे। करीब दस साल पहले शहीद की प्रतिमा को बीच चौराहे से हटाकर फुटपाथ पर रख दिया। मैंने सेना के अधिकारी, मंडलायुक्त, डीएम, दिल्ली हेड क्वार्टर, पुलिस के आईजी से हाथ जोड़कर विनती की कि मनोज तलवार देश की खातिर शहीद हुआ है। प्रतिमा के साथ ऐसा बर्ताव तो न करें परंतु सुनवाई नहीं हुई।
बेटे को न्याय न दिला सके
कैप्टन (रिटायर्ड) पीएल तलवार की आंखों में आंसू आ गए। बोले, लेह का हवाई अड्डा दुनिया में सबसे ऊंचाई पर है। मुझे 1964 में आदेश मिला था कि अपनी देखरेख में इसे बनवाएं। मैं ढाई माह तक दिन-रात कॉफी के सहारे रहा। हालांकि सेना के जवानों को कभी हार नहीं मानने दी। इसके बाद सेना प्रमुख ने मुझे प्रशंसा पदक एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया था। लेह, लद्दाख की राजधानी मानी जाती थी। वहीं से सियाचिन की रखवाली होती थी। मैंने वह हवाई अड्डा बनवाया लेकिन अपने शहीद बेटे की प्रतिमा को उचित स्थान न दिला सका। मैं उस दिन इंसाफ मानूंगा जब शहीद की प्रतिमा बीच चौराहे पर स्थापित की जाएगी। उसे डेयरी फार्म तिराहे पर ही स्थापित कर दिया जाए।
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