समर्पण भाव से ही इंद्रियों पर रखा जा सकता संयम : भाव भूषण महाराज
हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का शनिवार को पांचवें दिन विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों के साथ शुभारंभ किया।
आदिनाथ भगवान की पूजन के बाद सभी तीर्थंकरों को 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 81 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन किया गया। उमेश जैन ने संस्कृत भाषा में भक्तामर पाठ किया। अनेक प्रांतों से पधारे यात्री सवाईलाल जैन, चिंतामणि जैन, रुचि जैन, अतुल जैन, अमल, अनुष्का जैन, रुक्मिणी जैन, भूषण जैन, मधु जैन, दीपक जैन परिवार ने पाठ का वाचन किया।
गुरुवर भाव भूषण ने कहा कि समर्पण भाव से ही इंद्रियों पर संयम रखा जा सकता है। एक मुनि कछुए के समान होता है। जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को सिकोड़कर स्वयं की रक्षा करता है। उसी प्रकार संत भी अपनी आकांक्षाओं व इंद्रियों पर संयम रखकर समाज व धर्म की रक्षा करता है। मन को स्थिर करने के लिए अध्यात्म को आत्मसार करना होगा। जिस प्रकार आप अपने प्रत्येक कार्य के लिए समर्पित होते है। उसी प्रकार सत्संग व जिनवाणी के प्रति भी समर्पित होना होगा। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन सुनीता दीदी, लीला दीदी एवं गुरुकुल के बच्चों ने किया। अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, सुनील जैन, धनप्रकाश जैन, अनिल जैन आदि का सहयोग रहा।