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अमर उजाला की खास रिपोर्ट: टू जी नेटवर्क में फंसा गरीबों का गेहूं-चावल, नहीं चलतीं बायोमीट्रिक मशीनें

Mon, 15 Apr 2019 04:42 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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फाइल फोटो
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मेरठ में राशन की कालाबाजारी रोकने और हर गरीब कार्ड धारक को सरकारी गेहूं और चावल देने की व्यवस्था के लिए शासन द्वारा शुरू की गई बायोमीट्रिक मशीनों की व्यवस्था देहात में पहुंचते ही ध्वस्त हो रही है।

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देहात के कई इलाकों में मशीनों तक नेटवर्क ही नहीं पहुंच रहा है। दरअसल 4जी नेटवर्क के युग में भी राशन वितरण की मशीनें अभी टू जी नेटवर्क पर ही आधारित हैं। यही कारण है कि सरधना तहसील के गांवों में जनता को मिलने वाला सरकारी गेहूं और चावल फंस रहा है।  

राशन कार्ड में फर्जीवाड़ा और कालाबाजारी की शिकायतों के बाद शासन ने सभी राशन कार्डों को आधार से लिंक करके बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवाकर राशन वितरण की व्यवस्था शुरू कराई। पिछले साल 2018 तक मशीनों से राशन वितरण की व्यवस्था केवल शहरों तक ही सीमत थी। लेकिन अब सरकार ने इस व्यवस्था को देहात में भी उतारना शुरू कर दिया है। 
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जनवरी से गांवों में पहुंची मशीनें 
आपूर्ति विभाग ने देहात में मशीनों से राशन वितरण की व्यवस्था जनवरी 2019 में सरधना तहसील से की। तहसील के सभी गांवों में राशन डीलरों को बायोमीट्रिक मशीनें दी गईं, ताकि मशीनों पर कार्ड धारक और उसके परिवार के सदस्यों का अंगूठा लगवाकर ही राशन वितरण किया जा सके। 300 से अधिक मशीनों से सरधना तहसील के गांवों में राशन डीलर गेहूं और चावल वितरण का दावा कर रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि 2जी कनेक्शन होने के कारण देहात में सभी मशीनें काम ही नहीं कर रही हैं। कई-कई बार कार्ड धारकों को राशन की दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

लखनऊ से जुड़ी हैं बायोमेट्रिक मशीनें 
राशन की दुकानों पर लगाए गयी बायोमीट्रिक मशीनों को सीधे लखनऊ में सर्वर से जोड़ा गया है। जैसे ही कार्ड धारक के अंगूठा लगाने पर मशीन से पर्ची निकलेगी तो सीधे उसकी रिपोर्ट सर्वर में पहुंच जाएगी। जो यह साबित करेगी कि कार्ड धारक को राशन मिल गया है। वह बात अलग है कि राशन डीलर गरीबों से अंगूठा लगवाने के बाद खाली हाथ वापस लौटा देता हो।

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90 प्रतिशत कार्ड धारकों को आधार से जोड़ने का दावा 
जिले में करीब पांच लाख कार्ड धारक हैं। जिनमें से 90 प्रतिशत कार्ड धारकों को आधार से जोड़ने का दावा किया जा रहा है। पूर्व में फर्जी आधार लिंक के जरिए ही प्रदेश भर में राशन घोटाला किया गया था। जिसको लेकर अब शासन ने राशन कार्ड और आधार को लिंक करने के बाद सॉफ्टवेयर का सहारा लिया है। ताकि फर्जीवाड़े की गुंजाइश ही न रहे। 

प्रॉक्सी से भी होता है राशन वितरण 
आपूर्ति विभाग ने मशीनों के अलावा आधार कार्ड की फोटो कॉफी के माध्यम से मैनुअल व्यवस्था के साथ राशन वितरण की व्यवस्था को प्रॉक्सी का नाम दिया है। प्रॉक्सी से राशन वितरण उस व्यवस्था में दिया जा सकता है जब मशीन काम न करे अथवा किसी का फिंगर प्रिंट मशीन स्वीकार न करे। तो ऐसे परिवारों को प्रॉक्सी के माध्यम से राशन वितरण किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल माह के अंत में ही किया जा सकता है।

नहीं होगी नेटवर्क की दिक्कत
जिलापूर्ति अधिकारी विकास गौतम का कहना है कि शुरुआत में देहात के कुछ गांवों में दिक्कत थी। डीलरों ने शिकायतें भी की थी। लेकिन अब काफी सुधार हुआ है। जो डीलर नेटवर्क की शिकायत करते हैं उनके यहां इंजीनियर भेजकर मशीनों की जांच कराई जाती है। अगर माह के अंत तक भी नेटवर्क की दिक्कत रहती है तो कार्ड धारक से आधार कार्ड आईडी लेकर उसको राशन दिया जाता है। मशीनों से राशन वितरण व्यवस्था इसी माह से सदर तहसील और मवाना तहसील के गांवों में भी पहुंच जाएगी। इन दोनों तहसीलों में दूसरी कंपनी की मशीनें भेजी जा रही हैं। जिनमें नेटवर्क की दिक्कत नहीं होगी।

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