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करीमपुर में बूथ कैप्चर, बाकी चुनाव शांतिपूर्ण

Sun, 18 Oct 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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हस्तिनापुर के करीमपुर गांव में बूथ कैप्चरिंग की घटना को छोड़ दें तो तीसरे चरण का चुनाव दूसरे चरण के अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा। प्रशासन की सख्ती के आगे फर्जीवाड़ा करने वाले इस बार बेबस नजर आए। सख्त और निष्पक्ष रवैये के बीच जनपद के तीनों ब्लॉकों मवाना, परीक्षितगढ, और हस्तिनापुर में कुल 69.62 प्रतिशत मतदान हुआ।
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तीसरे चरण में जिला पंचायत की आठ और क्षेत्र पंचायत की 212 सीटों के लिए शनिवार को मतदान हुआ। जिसमें मवाना में 103870 में से 72283 मतदाताओं ने वोट डाले। यहां पर कुल 69.59 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। परीक्षितगढ़ में 124060 में से 86286 मतदाताओं ने मतदान किया। यहां प्रतिशत 69.55 रहा। वहीं, हस्तिनापुर में 85873 में से 59906 मतदाताओं ने हिस्सा लिया। जिनका प्रतिशत 69.76 रहा।

मतदान के दौरान मवाना के ग्राम तिगरी, परीक्षितगढ़ के ग्राम धनपुर और बहादरपुर में हंगामे के बीच मारपीट की घटनाएं हुई। लेकिन पुलिस ने हंगामा करने वालों को खदेड़कर स्थिति पर काबू पा लिया। वहीं, शाम करीब सवा चार बजे हस्तिनापुर ब्लॉक के ग्राम करीमपुर स्थित प्राथमिक पाठशाला के बूथ नंबर 50 पर कारों में सवार होकर आए आधा दर्जन से ज्यादा युवक जबरन पोलिंग बूथ में जा घुसे।
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इन दबंगों ने पोलिंग एजेंट के साथ मिलकर बूथ कैप्चरिंग की। इस दौरान गांव की भीड़ भी इनके साथ हो गयी।  जिससे वहां मौजूद पुलिसकर्मी असहाय हो गए। पीठासीन अधिकारी एके गुप्ता ने बताया कि करीब 20 मिनट तक इन युवकों ने स्वयं मतपत्र लेकर मुहर लगाकर बैलेट बॉक्स में डाले और फरार हो गए। सूचना पर पहुंचे एसपी देहात कैप्टन एमएम बेग ने पुलिसकर्मियों को बूथ कैप्चरिंग करने वालों पर फायरिंग न करने के लिए फटकार लगायी।

वहीं, पोलिंग एजेंट को हिरासत में लेकर बहसूमा थाने भेज दिया गया। सूचना पर डीएम पंकज यादव और एसएसपी डीसी दूबे भी बहसूमा थाने पहुंचे और घटना की जानकारी ली। इस मामले में पीठासीन अधिकारी ने जहां अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करायी है। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी ने राज्य निर्वाचन आयोग को इसकी रिपोर्ट भेज दी है।

करीमपुर में चुनाव बिगाड़ने वाले 10 गिरफ्तार
मेरठ। हस्तिनापुर ब्लाक के करीमपुर गांव में बूथ नंबर 50 पर बूथ कैप्चरिंग कर चुनाव बिगाड़ने के मामले में एसएसपी ने एसओ बहसूमा को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसमें पुलिस ने संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। इस मामले में एसएसपी ने बूथ पर तैनात पुलिस कर्मियों की भी जांच शुरू कर दी गई है। एसएसपी दिनेशचंद दूबे ने बताया कि मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।

बूथ के आसपास जो पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, उनकी भी जांच कराई जा रही है। जिन एजेंटाें या अन्य लोगों ने बूथ कैप्चरिंग करते हुए चुनाव बिगाड़ने की कोशिश की, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी के निर्देश पर बहसूमा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसओ बहसूमा रामरतन यादव ने बताया कि दस 10 लोगों के खिलाफ 135ए, 147, 353, 171 आईपीसी और 427 के तहत मुकदमा दर्ज करते हुए गिरफ्तारी की गई है।

वादे गए भुलाए, याद रहा जाति संप्रदाय  
जिला पंचायत के अधिकांश वार्ड में रहा बहुकोणीय मुकाबला
मेरठ। तीसरे चरण के मतदान में जिला पंचायत के अधिकांश वार्ड में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबला नजर आया। सिर्फ वार्ड 31 ही ऐसा रहा, जहां आमने-सामने की टक्कर रही। तीसरे चरण के दूसरे नंबर के वीआईपी वार्ड दो का चुनाव भी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा नजर आ रहा है। 

शनिवार को जिला पंचायत के वार्ड एक से पांच और वार्ड 32 से 34 तक के लिए मतदान था। साथ ही वार्ड 31 के भी परीक्षितगढ़ ब्लॉक अंतर्गत आने वाले सात गांवों में मतदान हुआ। इनमें अगर चर्चित वार्डों की बात करें तो वार्ड एक, दो और 31 पर सबकी नजर टिकी थी।

वार्ड एक में छह प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा ने गुर्जर नेता मुखिया गुर्जर के बेटे कुलविंदर को मैदान में उतारा था। लेकिन उनके सामने मांगे राम, शमीम और बाबूराम ने कड़ी चुनौती पेश की। यहां पर मांगेराम को सपा नेता मुकेश सिद्धार्थ, बाबूराम को विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि और शमीम को पूर्व विधायक योगेश वर्मा चुनाव लड़ा रहे थे।

वार्ड दो वीआईपी वार्ड था। यहां से समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान की पत्नी सीमा चुनाव मैदान में थीं, जबकि उनके सामने अतुल प्रधान के ही साथी रहे अनुज भाटी की पत्नी मोनिका को भाजपा ने मैदान में उतारा था। यहां पर इन दोनाें को सीना निवासी आकाश की माता प्रेमवती उर्फ रूपवती ने कड़ी टक्कर देते हुए मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया। लेकिन लगभग सभी जगह अतुल प्रधान समर्थकों की मौजूदगी ने उन्हें मुकाबले में बेहतर तरीके से बनाए रखने का संकेत दिया।

वार्ड तीन से दस प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन मुकाबले में भाजपा के नितिन खटीक के साथ ही बसपा के मलखान के साथ वर्तमान जिपं सदस्य विपेंद्र सुधा वाल्मीकि नजर आए। इस वार्ड में भी मुकाबला त्रिकोणीय नजर आया। जबकि यहां से सपा के जगमोहन और रालोद के राजेंद्र सिंह भी कुछ जगह इन तीनों को टक्कर देते दिखे।

वार्ड चार पर मवाना क्षेत्र के लोगों की विशेष नजर थी। क्योंकि यहां से ब्लॉक प्रमुख धीरज पहाड़पुरिया के सामने उनके करीबी दोस्त रहे हितेश उर्फ बंटी सांधन चुनाव मैदान में थे। बंटी को पूर्व विधायक योगेश वर्मा का समर्थन प्राप्त था। लेकिन इन दोनों की भिड़ंत को सांधन के ही भोला चौधरी ने रोचक बनाते हुए मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया। 
वार्ड पांच अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने से यहां पर 18 प्रत्याशी मैदान में थी और सभी अपने पक्ष में आंकड़े मजबूत बताते नजर आए। यहां पर मुकाबला पूरी तरह बहुकोणीय नजर आया। वार्ड 32 से 12 प्रत्याशी मैदान में थे। जिनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य संजय के साथ ही भाजपा के डॉ. सुशील, इंतजार अहमद खां और मुन्ना गिरी के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला नजर आया।

वार्ड 33 में मुकाबला सबसे रोचक था। यहां से 17 प्रत्याशी मैदान में थे और अहम बात ये रही कि शायद ही कोई गांव ऐसा रहा, जो इस वार्ड में शामिल हो और उससे प्रत्याशी न खड़ा हो। बावजूद इसके यहां पर मुकाबला भाजपा के राकेश त्यागी उर्फ पीलू जो कि वर्तमान जिला पंचायत सदस्य भी हैं, उनके  और कैबिनेट मंत्री के करीबी इंतजार ललियाना के बीच सिमटा नजर आया। हालांकि कहीं पर विनोद कुमार, रोहताश पहलवान ने इन दोनाें को कई जगह टक्कर देने का प्रयास किया, लेकिन जातीय आंकड़ों में फंसे मतदाताओं के बीच राकेश और इंतजार ही मुकाबला करते नजर आये। वार्ड 34 से समाजवादी छात्र सभा के विपिन भड़ाना के साथ ही सपा नेता मेघराज मैदान में थे, लेकिन यहां 20 प्रत्याशी मैदान में होने से मतदाता ऐसे बिखरे कि मुकाबला बहुकोणीय हो गया। इस वार्ड में कपिल ऐंची, लोकेश धामा और दिलशाद भी मुकाबले में बने नजर आए।

वार्ड 31 में भाजपा बाहर
जनपद के सबसे चर्चित वार्ड 31 में छह प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन शुरूआत में मुख्य मुकाबले में सपा प्रत्याशी नवाजिश मंजूर, बसपा के वसीम जब्बार और भाजपा की मंजू बाला पर सबकी नजर थी। लेकिन 13 अक्तूबर को हुए मतदान में ही मंजू बाला मुकाबले से बाहर नजर आईं। यहां पर मतदाताओं का ऐसा ध्रुवीकरण हुआ कि अधिकांश वोट सपा और बसपा प्रत्याशियों के बीच ही बंटते नजर आए। अहम बात ये रही कि गुर्जर होेने के बावजूद मंजू बाला गुर्जर वोटों के बीच ही जूझती नजर आईं।

घेराबंदी से फड़फड़ाए प्रत्याशी 
जिला पंचायत के सबसे चर्चित वीआईपी वार्ड 31 की इस बार ऐसी घेराबंदी हुई कि प्रत्याशी और उनके समर्थक फड़फड़ाए घूमते रहे। फर्जी मतदान की सारी प्लानिंग धरी रह गयी। हाल ये था कि प्रत्याशी पोलिंग बूथ के भीतर तक प्रवेश नहीं कर पा रहे थे। एक-एक वोटर के पहचान पत्र की गहनता से जांच के बाद ही मतदान की इजाजत मिल पाई। इसको लेकर कई बार जहां कैबिनेट मंत्री के प्रत्याशी पुत्र नवाजिश की अधिकारियों से नोंकझोंक हुई तो कई बार दूसरे प्रत्याशी समर्थकों से भी भिड़ते नजर आए।

दूसरे चरण के मतदान में वार्ड 31 के तहत आने वाले माछरा ब्लॉक के गांवों में मतदान हुआ था। जिसमें ग्राम इंद्रपुरा और राधना को लेकर तमाम आरोप लगे थे। राधना में तो फर्जीवाड़े के आरोप में पथराव और फायरिंग तक हुई थी। इस मतदान प्रक्रिया पर प्रशासन कटघरे में खड़ा हो गया था। लेकिन शनिवार को परीक्षितगढ़ ब्लॉक के इस वार्ड में आने वाले गांवों में हुआ मतदान इतने कड़े पहरे में हुआ कि फर्जीवाड़ा करने वाले फड़फड़ाते घूमते रहे।

तीसरे चरण के मतदान में वार्ड 31 के गांव शौंदत्त, ललियाना, बौंद्रा, नवलसूरजपुर, अतलपुर, छुछाई और शिवपुरी में मतदान हुआ। इनमें नवलसूरजपुर, छुछाई और शिवपुरी जहां गुर्जर बाहुल्य गांव होने के कारण पुलिस प्रशासन की नजर में संवेदनशीलता से बाहर रहे। वहीं, अतलपुर में भी मिश्रित आबादी होने से यहां पर भी विशेष नजर नहीं रखी गयी। लेकिन सबसे बड़े और संवेदनशील गांव ललियाना और शौंदत्त की पूरी तरह नाकेबंदी कर दी गयी। शौंदत्त में सीडीओ नवनीत सिंह चहल और ललियाना में एसडीएम सदर रवीश गुप्ता को तैनात किया गया था। इनके साथ सुरक्षा की कमान एसपी ट्रैफिक पीके तिवारी संभाले हुए थे। इन तीनों अफसरों ने मतदान समाप्ति तक डेरा डाला रखा।

नहीं फटक सके प्रत्याशी
सख्ती का आलम ये था कि सपा प्रत्याशी नवाजिश मंजूर और उनके परिजन कई बार शौंदत्त और ललियाना के प्राथमिक पाठशाला मतदान केंद्र पर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने भीतर घुसने की इजाजत नहीं दी। यही नहीं, कैबिनेट मंत्री के भाई शम्स परवेज जब शौंदत्त पहुंचे तो एसपी ट्रैफिक ने उन्हें गांव में घूमने के बजाए किठौर जाने की नसीहत दे डाली। नवाजिश मंजूर ललियाना के मदरसे में बने मतदान केंद्र पर ही मंडराते रहे, लेकिन एसडीएम सदर रवीश गुप्ता ने एक नहीं सुनी। कई बार उनकी एसडीएम सदर से कुछ वोटों की आईडी नकारे जाने पर बहस भी हुई, लेकिन एसडीएम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। बीच-बीच में एसडीएम ने फोर्स के साथ मतदान केंद्रों के आसपास मार्च भी निकाला।

आमने-सामने आए तो बना तनाव
बसपा प्रत्याशी वसीम जब्बार के पक्ष में किठौर चेयरमैन मतलूब गौड़ और राज्यसभा सदस्य मुनकाद अली के भाई साजिद कमान संभाले थे। बौंद्रा और ललियाना में दो बार ऐसे मौके आए, जब नवाजिश सीधे उनसे भिड़ते नजर आए और गालीगलौज हुई। लेकिन पुलिस की सूझबूझ से मामला निपटा दिया गया।

बाहरी भीड़ का लाना गया बेकार
‘अमर उजाला’ ने शुक्रवार को प्रकाशित समाचार में जिस योजना का खुलासा किया था, वह योजना ललियाना और शौंदत्त में साफ नजर आयी। क्योंकि इन दोनों ही गांवों में बाहरी लोगों की भारी भीड़ जमा थी। किठौर ही नहीं हापुड़, गाजियाबाद और मेरठ तक से लोग यहां मौजूद थे। इन लोगों ने फर्जी आईडी से वोट डालने का भी प्रयास किया, लेकिन पकड़े जाने पर सारे मंसूबे फेल हो गए। फर्जी मतदान के लिए पुराने राशन कार्डों में नाम दर्ज किए गए तो बैंक पासबुक पर फोटो आदि बदलकर भी वोट देने का प्रयास किया गया। लेकिन इक्का-दुक्का मतदाता को छोड़ दें तो किसी को फर्जीवाड़े की छूट नहीं मिल सकी।
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