हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा के सम्मुख 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान पाठ में जिनेंद्र भगवान का अभिषेक हुआ। शांतिधारा समर्थ जैन, निर्मल जैन, सुशील जैन, मनीष जैन, मेघा जैन, पर्व जैन ने की। सहयोग सौरभ जैन, गुणांशु जैन ने किया।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि मान, घमंड, अभिमान को छोड़ो, क्योंकि यह नीच गति में ले जाने वाला है। मान को महान विष की संज्ञा दी गई। जिस प्रकार से विष व्यक्ति का सर्वनाश कर देता है, उसी प्रकार से मान (घमंड) करने वाले का भी सर्वनाश हो जाता है। चाहे हम कितने ही धनवान, ज्ञानवान, बलवान हों, परंतु इसका घमंड न करें। क्योंकि अभिमान पतन का कारण है। यह इंसान की सुख, शांति भंग कर देता है। रावण, कौरव, कंस बहुत शक्तिशाली, बुद्धिमान थे। किंतु इनके पतन का कारण इनका अहम रहा है। मुनि ने कहा कि भक्तजनों जीवन में कभी घमंड नहीं करना, हमेशा विनयशील बने रहना। क्योंकि विनयवान को ही विद्या आती है और ऐसे भक्तजनों को जीवन में यश, कीर्ति, पद, प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
विधान के 27वें दिन 450 परिवारों द्वारा मांडले पर अर्घ्य समर्पित किए गए एवं धर्मनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महामहोत्सव पर निर्वाण लाडू निर्मल जैन, अनिल जैन, मधु जैन, कुसुमलता जैन द्वारा समर्पित किए गए। शांतिनाथ विधान के 120 अर्घ्य मांडले पर समर्पित किए गए। सायंकालीन बेला में श्रद्धालुओं ने संगीतमय आरती की। सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चोें ने भाग लिया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, राकेश कुमार जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, राजीव जैन, मुकेश जैन, राजीव जैन, अभय कुमार जैन आदि का सहयोग रहा।