अभी तक मिल चुकी हैं ये चीजें
टीले के एक छोर पर बनाए गए पॉटरी यार्ड में मृदभांड समेत खोदाई से मिलने वाली पुरा सम्पदा को सुरक्षित किया जा रहा है। अभी तक टीम को मृदभांड, हड्डियाें के अलावा चबूतरानुमा आकृति मिली है। वहीं मंगलवार को हुई खोदाई में टीम को कुछ मृदभांड मिले हैं। अब पुरातत्वविदों की टीम नए पुरावशेषों के इंतजार में है।
देखना होगा कि खोदाई में क्या कुछ नया मिलता है, जिस पर सभी की नजर हैं। वहीं कुर्डी टीले पर उत्खनन करने से पूर्व तैयारी की जा रही है। टीम अपने निर्देशन में साफ-सफाई करा रही है। यह टीला भी इतिहास की दृष्टि से खास बना हुआ है।
कुर्डी टीले पर कराई गई सफाई
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प्रथम दृष्टया कुषाणकालीन व माैर्यकालीन प्रतीत हो रहे मृदभांड
तिलवाड़ा के जंगल में चल रही खोदाई से कुछ ऐतिहासिक प्रमाण मिले हैं। अभी तक निकले खंडित मृदभांड पुरातत्वविदों की टीम को प्रथम दृष्टया कुषाणकालीन व मौर्य कालीन प्रतीत हुए हैं। इन मृदभांड व हड्डियों की जांच के लिए कुछ नमूने भेज दिए गए थे। मगर अभी तक जांच नहीं हो पाई है, इसके बाद ही तस्वीर साफ होगी।
संभावना जताई जा रही है कि फरवरी के पहले सप्ताह तक पुरातत्वविदों को रिपोर्ट मिल जाएगी। इसके बाद इतिहास पता चलने पर खोदाई को उसके अनुसार ही तेज किया जाएगा। वहीं, सोमवार को हुई खोदाई में अधिक संख्या में खंडित मृदभांड मिले हैं, जिनसे यह उम्मीद जताई जा रही है कि वहां मानव बस्ती हो सकती है।
वहीं सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद भूपेंद्र सिंह फोनिया का कहना है कि खोदाई में मृदभांड व हड्डियां ही सामने आ रही हैं। फरवरी में हम उस स्थिति में होंगे कि किस दिशा में उत्खनन चल रहा है।
तिलवाड़ा में लगा हुआ है शोधार्थियों का आना
विभिन्न विश्वविद्यालयों के इतिहास विभाग के छात्र और शोधार्थियों का तिलवाड़ा साइट पर आना शुरू हो गया है। दिल्ली विवि, अशोका यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों का दौरा अब बागपत के लिए शुरू हो गया है। वहीं कुर्डी के विशाल टीले पर राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा जल्द प्रारंभिक सर्वेक्षण और उत्खनन कार्य शुरू किया जाएगा। जहां नेशनल म्यूजियम और दूसरी यूनिवर्सिटी के शोधार्थी आएंगे।