कोरोना महामारी में भी बाज नहीं आए मिलावटखोर
मेरठ। मिलावट से शायद ही कोई खाने की चीज अछूती हो। चंद पैसों की चाहत में मिलावट करने वाले सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। कोरोना महामारी में भी मिलावटखोर इससे बाज नहीं आए। अप्रैल 2020 से जून 2021 तक लिए गए 811 खाद्य सैंपलों के नमूने में से 413 फेल निकले हैं, जो करीब 51 प्रतिशत है। यानी आधे से ज्यादा सैंपल फेल निकले हैं। इस दौरान 45 लाख 98 हजार 500 रुपये जुर्माना भी वसूला गया है, लेकिन सुधार नहीं हुआ है।
दरअसल, लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के चलते मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कसा जाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है। सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है। शायद यही वजह है कि मिलावट के शक में कार्रवाई के बाद भी वही स्थिति हो जाती है। लचर पैरवी के चलते मिलावटखोरों का धंधा सालों से फल-फूल रहा है। खाद्य विभाग की कार्रवाई केवल नमूने भरने तक ही सीमित रह जाता है। एफएसडीए की अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि कोरोना काल के बावजूद एफएसडीए सक्रिय रहा। लगातार सैंपल जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते रहे और कार्रवाई की गई।
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जांच में इस तरह की मिलावट आई सामने
बूंदी के लड्डू, चिली सॉस, नमकीन, धनिया पाउडर, रिफाइंड ऑयल में सेहत के लिए खतरनाक रंगों की मिलावट पाई गई। इनके अलावा काफी खाद्य पदार्थ मानकों पर खरे नहीं उतरे। उनके लेबल में जो दर्शाया गया था वह नहीं निकला।
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यह हुई कार्रवाई
साल जुर्माना
2020-21 45.98 लाख
2019-20 70.88 लाख
2018-19 60.73 लाख
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मिलावट पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान
भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है। लेकिन मिलावट से संबंधित 90 फीसद मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिस कारण वह न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही तय किया जाता है कि मामलों को कौन सी कोर्ट में भेजना है। प्रशासनिक कोर्ट में केवल मिलावटखोरों पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई होती है। एडीएम सिटी की कोर्ट में मिलावट से संबंधित वादों की सुनवाई की जाती है। जिस पर सजा के तौर पर अधिक से अधिक पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाने का नियम है। वहीं न्यायालय से मिलावट के मामलों में अलग-अलग धाराओं में छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है। लेकिन ज्यादातर मामले न्यायालय की जगह प्रशासनिक कोर्ट में भेज दिए जाते हैं। जहां पर मिलावटखोर केवल जुर्माना भरकर छूट जाते हैं। इस कार्रवाई में भी लंबा वक्त बीत जाता है, मिलावटखोर खुलेआम तब तक अपना धंधा चमकाने में जुटे रहते हैं।