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मेडिकल की सफाई व्यवस्था ठप, मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर रहे तीमारदार

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मेडिकल में सफाई व्यवस्था ठप, मरीजों को वार्ड में कर रहे शिफ्ट
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में वेतन न मिलने से नाराज संविदा स्वास्थ्यकर्मियों का कार्य बहिष्कार मंगलवार को भी जारी रहा। कर्मचारी दिनभर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे। इससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी हुई। तीमारदारों को खुद मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करना पड़ा। प्राचार्य आरसी गुप्ता ने उन्हें 15 दिन में वेतन दिलाने का आश्वासन दिया, मगर कर्मचारी नहीं माने। उनका कहना था कि विश्वास नहीं किया जा सकता है, हो सकता है कि इस दौरान ये दूसरे कर्मचारी रख लें और नौकरी भी जाती रहे।
मेडिकल में दो कंपनियों विश्वा और डिग्नेस के जरिये 600 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी हैं। ये सफाई कर्मचारी, वार्ड ब्वाय और नर्सिंग स्टाफ तक हैं। सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के सामने प्रदर्शन कर रहे विश्वा कंपनी से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें न तो समय से वेतन मिलता है और न ही कोरोना काल का बोनस मिला है। तय किया गया था कि साढ़े 12 हजार रुपये माह दिए जाएंगे, लेकिन साढ़े सात हजार रुपये माहवार दिए जा रहे हैं। नए कर्मचारी भर्ती किए जा रहे हैं और पुराने हटाए जा रहे हैं।
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डिग्नेस कंपनी से जुड़े वार्ड ब्वाय ने पर्चा काउंटर के बाहर पार्क में धरना-प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि चार माह से मानदेय नहीं आया है। कोरोना या किसी दुर्घटना से संबंधित बीमा 25 लाख रुपये का बीमा होना चाहिए। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएगी, वे कार्य बहिष्कार जारी रखेंगे। प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता का कहना है कि संविदा कर्मचारियों को मनाने की कोशिश की जा रही है। इनके कार्य बहिष्कार से परेशानी हो रही है।
इमरजेंसी में गिराया कूड़ा, बुलानी पड़ी पुलिस
मेडिकल की इमरजेंसी में कूड़ा पड़ा देखकर प्राचार्य और मेडिकल पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। प्राचार्य ने पुलिस को बुला लिया। पुलिसकर्मियों ने कहा कि कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर सकते हैं, लेकिन इस तरह से कूड़ा नहीं फैला सकते। अगर फिर से कूड़ा फैलाया तो रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों का कहना था कि उन्होंने कूड़ा नहीं फैलाया।
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पांच सदस्य कमेटी बनाई
प्राचार्य ने बताया कि उन्होंने एसआईसी के नेतृत्व में पांच सदस्य कमेटी का गठन किया है, जो पहले जांच करेगी और उसके बाद किसी कर्मचारी को कंपनी से निकाला जाएगा। अपने से ही कंपनी किसी को नहीं निकाल पाएगी। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि उन्हें बिना बताए कंपनी से निकाल दिया जाता है।
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