फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गिड़गिड़ाता रहा बेटा... नहीं मिला इलाज, ऑक्सीजन की कमी से बुजुर्ग ने स्ट्रेचर पर तोड़ दिया दम 

Wed, 12 May 2021 11:27 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

पिता को स्ट्रेचर पर तड़पते देख किसान भंवर सिंह चीखते-चिल्लाते रहे। मिन्नतें करते रहे कि इनको कोरोना नहीं है, भर्ती करके इलाज शुरू कर दो। लेकिन भंवर सिंह की किसी ने नहीं सुनी।
विज्ञापन
corona in meerut - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मेरठ में 75 साल के बुजुर्ग की सांसें उखड़ रहीं थी। वो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। पिता को स्ट्रेचर पर तड़पते देख किसान भंवर सिंह चीखते-चिल्लाते रहे। मिन्नतें करते रहे कि इनको कोरोना नहीं है, भर्ती करके इलाज शुरू कर दो। लेकिन भंवर सिंह की किसी ने नहीं सुनी।

विज्ञापन


अस्पताल कर्मचारी यही कहते रहे कि पहले कोरोना टेस्ट कराओ, उसके बाद ही भर्ती करेंगे। काफी देर तक भी किसी ने भर्ती नहीं किया तो बुजुर्ग की सांसें शरीर का साथ छोड़ गईं। बेबस परिजन ये कहते हुए शव लेकर चले गए कि तुम अपने अस्पताल को संभालो, हमारा तो चला गया।

इंसानियत को तार-तार करने वाली ये घटना सोमवार सुबह जिला अस्पताल में हुई। दौराला के जीतपुर गांव निवासी भंवर सिंह के पिता भोपाल सिंह ठाकुर (75) को कई दिनों से फेफड़ों में परेशानी थी। भंवर ने बताया कि कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के बाद बुखार आया था, इसके बाद से तबीयत कुछ खराब थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रविवार को भोपाल सिंह को निजी अस्पताल में दिखाया था, सीटी स्कैन में उनके फेफड़ों में सूजन आई। उनका ऑक्सीजन स्तर 70 पर आ गया था। रविवार को खतौली स्वास्थ्य केंद्र पर परिजनों ने उनका कोरोना टेस्ट भी कराया। सुबह भोपाल सिंह को भर्ती कराने के लिए परिजन जिला अस्पताल आ गए।

इससे पहले उन्होंने ढाई सौ रुपये का ऑक्सीजन वाला छोटा काम चलाऊ सिलिंडर भी लिया। कुछ देर उससे ऑक्सीजन दी, लेकिन फिर हालत बिगड़ने लगी। एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचे और कर्मचारियों को जानकारी दी। स्टाफ ने पूछा कि इनकी कोरोना रिपोर्ट लाइए तो भंवर सिंह ने बताया कि कल टेस्ट कराया है, अभी रिपोर्ट नहीं आई है। स्टाफ ने उनको भर्ती करने से इनकार कर दिया।

बेटा भंवर सिंह चिल्लाता रहा कि इनको ऑक्सीजन तो लगा दो। भर्ती कर लो, फिर टेस्ट करा लेना, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। बूढ़ा बीमार शरीर कब तक सहन करता। भोपाल सिंह ने दम तोड़ दिया। कर्मचारी मुंह नीचे करके भीतर घुस गए। भोपाल सिंह के शव को परिजन गांव ले गए। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें