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प्रदूषण खत्म: हस्तिनापुर से दिखे उत्तराखंड के पहाड़, 50 से नीचे आया एक्यूआई, दो माह में सबसे साफ मेरठ की हवा

Mon, 11 Sep 2023 10:56 AM IST
Dimple Sirohi मोहित कुमार, अमर उजाला, मेरठ

सार

देश भर में प्रदूषित शहरों में मेरठ अक्सर तीसरे नंबर पर आता है, लेकिन सितंबर में हुई बारिश ने मेरठ की हवा को शुद्ध कर दिया है। ऐसे में हस्तिनापुर से उत्तराखंड के पहाड़ भी दिखाई देने लगे हैं।
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हस्तिनापुर से दिख रहे उत्तराखंड के पहाड़ - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सामान्य दिनों में असामान्य रहने वाला मेरठ का प्रदूषण इस समय कम है। बारिश ने मेरठ की हवा को शुद्ध कर दिया है। इसका असर यह है कि हस्तिनापुर से उत्तराखंड के पहाड़ भी दिखाई देने लगे हैं। 300 से 400 तक पहुंचने वाला एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 50 से नीचे आ गया है। अगस्त और सितंबर में पिछले पांच वर्षों में इस बार एक्यूआई सबसे कम है।

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वैसे तो प्रदूषित शहरों में देश में मेरठ का स्थान तीसरे नंबर पर आता है। यहां पर प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त और सितंबर में मेरठ की हवा स्वच्छ हो गई है। 

रविवार शाम जैसे ही बारिश बंद हुई तो आसमान में इंद्रधनुष दिखाई दिया। मौसम पूरी तरह साफ होने के कारण खादर क्षेत्र के गांव तारापुर, फाजलपुर, नगली गजरौली आदि से उत्तराखंड के पहाड़ों का मनोरम दृश्य दिखाई दिया। लोगों ने छतों पर चढ़कर इस दृश्य को अपने मोबाइल में कैद किया।
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मेरठ में प्रदूषण को रोकने के लिए पिछले साल एक अक्तूबर को ग्रेप सिस्टम लागू कर दिया गया था, जबकि अन्य वर्षों में यह 15 अक्तूबर को लागू किया जाता था।

हालांकि वर्तमान में जो प्रदूषण का स्तर चल रहा है, वह बहुत अच्छा है। ग्रीन श्रेणी में मेरठ की हवा चल रही है। अक्तूबर में प्रदूषण न बढ़े इसके लिए भी प्रयास किए जा रहे है।

ये है ग्रेप सिस्टम 
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी भुवन प्रकाश यादव का कहना है कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेड) वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी। इसे 2017 में पहली बार लागू किया गया था। वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर होने पर इसे लागू किया जाता है। इस बार भी विभाग ने पहले से ही अपनी तैयारी शुरु कर दी है। 
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बढ़ता है प्रदूषण 
औद्योगिकी इकाइयों से निकलने वाला धुआं, डस्ट बालू व हानिकारक तत्व, वाहनों का अत्यधिक आवगामन, टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल, खुले में कूड़ा जलाना, वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जित कार्बनिक तत्व से प्रदूषण बढ़ता है।

पांच साल में सितंबर का हाल 
वर्ष    एक्यूआई  

2023    40  
2022    70 
2021    110
2020    140 
2019    165 

शुरु से ही मानसून की स्थिति अच्छी होने के कारण इस बार वातावरण से धूल के कण पूरी तरह से साफ हो गए हैं। यही कारण है कि हस्तिनापुर क्षेत्र से उत्तराखंड के पहाड़ तक दिखाई देने लगे हैं। - डॉ. यूपी शाही, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विवि
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