नई कॉलोनियों में सड़कों का हाल खराब
गंगानगर, पल्लवपुरम, शताब्दीनगर, वेदव्यासपुरी, रक्षापुरम, विकास विहार, मेजर ध्यानचंद नगर, सैनिक विहार, पांडवनगर , डिफेंस एंक्लेव, श्रद्धापुरी, लोहियानगर, आलोक विहार जैसी नई कॉलोनियों में सड़कों की हालत भी खराब है।
20 वर्ष पहले 120 सिटी बसें, अब सिर्फ 80
बीस साल पहले शहर में120 प्राइवेट सिटी बसों का संचालन होता था लेकिन अब रोडवेज की मात्र 80 सीएनजी बसें चल रही हैं। बसों के अभाव में इन बीस सालों में सड़कों पर अवैध टैंपों और ई-रिक्शा बढ़े हैं।
सड़कों पर दबाव: 23 गुना बढ़े वाहन
वर्ष 2001 में जिले में करीब 40 हजार वाहन पंजीकृत थे। अब यह संख्या 9.30 लाख तक पहुंच गई है। यानि वाहनों की संख्या में 23 गुना से भी ज्यादा वृद्धि हुई है।
2001 में शहर की आबादी:11 लाख 70 हजार 985
2011 में शहर की आबादी: 17 लाख 59 हजार 182
2021 तक शहर की अनुमानित आबादी: 20 लाख
जनगणना के अनुसार घरों का आंकड़ा
वर्ष 2001 - दो लाख 28 हजार 67
वर्ष 2011 - तीन लाख नौ हजार 467
साक्षरता दर प्रतिशत में
वर्ष 2001 - 67.50 प्रतिशत
वर्ष 2011 - 75.66 प्रतिशत
नहीं बढ़ी डाकघरों की संख्या
बीते 20 वर्ष में डाकघरों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है। मेरठ-बागपत में वर्ष 2001 में 399 डाकघर थे। आज भी यह संख्या 399 ही है।
जिले में डाक घर वर्ष 2001 वर्ष 2021
हेड पोस्ट ऑफिस 3 3
उप डाकघर 79 79
ब्रांच ऑफिस 317 317
शहर में 1000 किलोमीटर सीवर लाइन की जरूरत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 310 एमएलडी सीवर निकलता है। इसके लिए जल निगम ने 72 एमएलडी का प्लांट जागृति विहार में है। इसके अलावा 220 एमएलडी क्षमता का प्लांट काली नदी किनारे लगना है। शहर में 1800 किमी की सीवर लाइन होनी चाहिए, लेकिन अब तक सिर्फ 800 किमी लाइन ही डाली गई है।