मेरठ। नए गृहकर पर बखेड़ा जारी है और नगर निगम उसका समाधान भी नहीं कर पाया। भाजपा के साथ अब विपक्ष पार्षदों में भी गुस्सा है। शनिवार को कांग्रेसियों ने भी इस मामले में प्रदर्शन किया। इसके चलते महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने नए गृहकर वितरित कराने पर फिर से रोक लगा दी और 100 फीसदी स्वकर निर्धारण प्रपत्र घर-घर बांटने के नगर आयुक्त को निर्देश दे दिए।
नए गृहकर को लेकर महानगर में एक साल से लगातार विवाद चल रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर शहर में नए बिल वितरित कर गृहकर की वसूली निगम ने शुरू कर दी थी। इसे लेकर लोगों में जबरदस्त आक्रोश था। महानगर में शायद ही ऐसा कोई घर बचा है। इसमें चार से लेकर 10 गुना तक बढ़ाकर गृहकर के बिल न भेजे गए हो। भाजपा नेताओं और पार्षदों के साथ विपक्ष नेताओं ने भी अपनी नाराजगी लगातार निगम से जारी रखी। करीब 10 महीने पहले निगम की बोर्ड बैठक महापौर ने नए गृहकर को होल्ड कर दिया था। इसको निगम ने तीन माह से नए गृहकर की वसूली करनी शुरू कर दी थी।
महानगर में नए गृह कर को लेकर बढ़ते विवाद और नए संग्राम के अंदेशे को देखते हुए महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने निगम के अधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक की। महानगर की समस्या को देखते हुए महापौर ने भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर बढ़ाने वाले नए गृहकर के बिल तुरंत रोकने के निर्देश जारी कर दिए। साथ ही घर-घर स्वकर निर्धारण प्रपत्र बंटवाने के निर्देश दिए। महापौर ने नगर आयुक्त से कहा है कि निगम अधिकारियों कर्मचारियों के साथ-साथ एक निजी कंपनी को हायर किया जाए। जिसके जरिए लोगों के घर-घर स्वकर निर्धारण प्रपत्र जाए और उनको समझकर नए गृहकर के बारे में बताएं। उसके बाद ही लोगों से गृहकर लेना सुनिश्चित करें।