नगर निगम में रोज नए कारनामे सामने आ रहे हैं। अब तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने लगभग डेढ़ करोड़ के खेल का खुलासा किया है। निगम प्रशासन ने कंपनी से वाहन और सफाई की मशीनों की डिलीवरी लिए बगैर ही भुगतान कर दिया है। मामले का खुलासा होने पर अमर उजाला की टीम ने निगम के स्टोर और सभी वाहन डिपो पर जांच पड़ताल की तो वहां कोई भी नई मशीन नहीं मिली।
13वें वित्त आयोग की धनराशि से निगम में लगभग डेढ़ करोड़ रुपये से आठ हाईड्रॉलिक ट्रक ट्रिपर, 10 छोटे हाथी, तीन आरसी खरीदे गए हैं। इतना ही नहीं एक करोड़ से अधिक के छोटे डस्टबिन भी खरीदे गए। टेंडर के समय से ही इन वाहन और संयंत्रों को लेकर उंगलियां उठती रही हैं। विवाद के चलते ही नगरायुक्त उमेश प्रताप ने हाईड्रॉलिक ट्रिपर का 22 मार्च को री-टेंडर कराया था। इसके तहत कंपनी को सात दिन के भीतर (29 मार्च तक) ट्रिपर की डिलीवरी करनी थी, लेकिन हुई नहीं।
अब वित्तीय वर्ष 2015-16 खत्म हो चुका है। वहीं नगर निगम प्रशासन ने वाहनों की डिलीवरी लिए बगैर ही कंपनी को लगभग डेढ़ करोड़ का भुगतान कर दिया। इसका खुलासा शनिवार को तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेम सिंह ने मीडिया से बातचीत में किया। इसके बाद अमर उजाला टीम ने दिल्ली रोड, सूरजकुंड, कंकरखेड़ा वाहन डिपो और मुख्यालय स्टोर पर जांच पड़ताल की तो इनमें से वहां कोई वाहन नहीं मिला।
नगर निगम में एक अप्रैल तक हाईड्रॉलिक ट्रिपर, छोटे हाथी, और आरसी की डिलीवरी नहीं की गई। जबकि नगरायुक्त ने 31 मार्च से पहले ही आनन-फानन में वाहनों का कंपनी को लगभग डेढ़ करोड़ का भुगतान करा दिया। निगम में मशीन हो या डस्टबिन सभी भुगतान नगरायुक्त की संस्तुति पर होते हैं। किसी भी गलत भुगतान के लिए नगरायुक्त जिम्मेदार हैं।
डॉ. प्रेम सिंह, तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी
किसी भी मद का भुगतान तभी होता है, जब संबंधित विभागाध्यक्ष और अन्य अधिकारियों की स्वीकृति होती है। वाहन आए या नहीं, यह देखना अकाउंट विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। जो भी फाइल हमारे पास पहुंची, 31 मार्च तक सभी का भुगतान कर दिया गया।
मोइनुददीन, मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी
यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। अगर वाहनों की डिलीवरी हुए बगैर ही भुगतान हुआ तो गलत है। जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह तत्कालीन नगर स्वास्थ्य अधिकारी का खेल रहा होगा।
- उमेश प्रताप, नगरायुक्त
अगर वाहन लिए बगैर ही भुगतान किया है तो बेहद गलत है। नगरायुक्त से इस संबंध में बात कर जांच कराई जाएगी।
हरिकांत अहलूवालिया, महापौर