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अदालत में बोला झूठ, लगी फटकार, मांगा जवाब

Fri, 15 Jan 2016 01:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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हाईकोर्ट में नगर निगम अधिकारियों ने ऐसे आंकडे़ पेश किए कि अदालत ने ही उन्हें अविश्वसनीय मान लिया। कहा कि सही जानकारी कर अगली तारीख यानी दस मार्च को सही आंकड़े पेश करें। साथ ही नगर निगम को आदेश दिया है कि वह अपने क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि की पहचान कर न्यायालय को बताए। नगर आयुक्त डोर टू डोर कूड़ा उठवाने की तत्काल व्यवस्था करें। मेरठ के लोकेश खुराना की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने यह निर्णय दिया है।
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पूर्व के आदेश पर अदालत में हाजिर हुए नगर आयुक्त मेरठ ने हलफनामा दाखिल कर बताया कि मेरठ में कुल 300 सरकारी और प्राइवेट अस्पताल तथा नर्सिंग होम हैं। जिनसे 428 किलो प्रतिदिन मेडिकल कचरा उत्सर्जित होता है। खंडपीठ ने इस जानकारी पर हैरानी जताते हुए कहा कि ऐसा कैसे संभव है कि मेरठ में सिर्फ तीन सौ ही अस्पताल तथा नर्सिंग होम हैं। यह बात भी विश्वसनीय नहीं है कि एक अस्पताल से मात्र डेढ़ किलो मेडिकल कचरा एक दिन में निकलता है।

निगम के अधिवक्ता का कहना था कि यह सूचना उनको सीएमओ के जरिए मिली है। पीठ का कहना था कि अस्पताल नगर निगम के क्षेत्र में आते हैं तो निगम को भी इसकी सूचना होनी चाहिए। अगली तारीख पर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कूड़ा निस्तारण प्लांट के बाबत भी जानकारी देने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने शहर से उत्सर्जित होने वाले ठोस कचरे के बारे में भी नगर आयुक्त से जानकारी मांगी है। पूछा है कि नगर निगम की सीमा में प्रतिदिन कितना ठोस कचरा उत्सर्जित हो रहा है। इसको उठाने, रखने और निस्तारित करने की क्या व्यवस्था है। निगम के पास कितने वाहन हैं। कर्मचारियों की संख्या और ठेके पर कराए जाने वाले काम की भी जानकारी मांगी है।

निगम ने दिया जवाब
निगम ने बताया कि ठोस कचरे के निस्तारण के लिए प्लांट का निर्माण प्रगति पर है। 17 दिसंबर 2015 को टेंडर मांगा गया है। नगर निगम द्वारा दी गई जानकारियों पर अदालत ने असंतोष जाहिर करते हुए अगली सुनवाई पर पूरा डाटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। नगर आयुक्त को डोर टू डोर कूड़ा उठाने के संबंध में तत्काल निर्देश जारी करने और प्रबंध करने के लिए कहा है। लोकेश खुराना की जनहित याचिका में मेरठ शहर में साफ सफाई की बदतर व्यवस्था का मामला उठाया गया है।

निगम का सफेद झूठ, समुचित नहीं इंतजाम
मेरठ। शहर में दो मेडिकल कालेजों समेत करीब 400 से अधिक क्लीनिक, निजी और प्राइवेट अस्पताल एवं नर्सिंग होम संचालित है। जिनके मेडिकल वेस्ट (कचरे) को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज ने एक निजी कंपनी को मेडिकल कचरा उठाने का ठेका दिया है। लेकिन उसके कॉलेज में कई जगह मेडिकल बेस्ट पड़ा देखा जा सकता है। औसतन रोजाना मेडिकल कॉलेज में 75 किलो से लेकर एक क्विंटल तक मेडिकल कचरा एकत्र होता है। जिसमें प्रतिदिन सर्जरी से लेकर व अन्य डिपार्टमेंट इकट्ठा होने वाला औसतन 10 से 15 किलो का बायोमेडिकल वेस्ट भी शामिल है।

इस हिसाब से अगर देखा जाए तो जिला सरकारी अस्पताल और  महिला अस्पताल से भी 80 से 90 किलो मेडिकल कचरा तैयार हो जाता है। जिसमें करीब 10 किलो बायो मेडिकल कचरा भी शामिल है। इसी से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब 1020 बेड से ऊपर वाले मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब एक क्विंटल का कचरा तैयार होता है तो प्रति बेड के हिसाब से करीब एक किलो के आसपास बैठ जाता है।

जिले में क्लीनिक को छोड़ दिया जाए तो करीब 223 नर्सिंग होम व अस्पताल संचालित है। जिसमें अगर 50 बेड के हिसाब से अनुमानित औसत लगाया जाए तो 11150 बेड बैठ जाते हैं। जिसमें एक किलो प्रति बेड के हिसाब से कचरा जोड़ा जाए तो करीब 10 हजार क्विंटल मेडिकल कचरा रोजाना तैयार हो रहा है। जिसमें 10 प्रतिशत बायो मेडिकल वेस्ट माना जाए तो एक हजार क्विंटल तक बैठ जाता है। आंकड़ों पर इसलिए भी यकीन किया जाता सकता है कि रोजाना मेडिकल और जिला अस्पताल में मेल व फीमेल को मिलाकर 6 हजार के आसपास मरीजों की ओपीडी होती है।

उसमें से 400 मरीज प्रतिदिन मेडिकल कालेज और करीब दो सौ मरीज दोनों अस्पतालों में भर्ती रहते हैं। इस तरह से प्राइवेट में भी आठ से दस हजार मरीजों की ओपीडी होती है और करीब पांच से सात हजार मरीजों भर्ती रहते हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा तैयार हो रहा है। लेकिन किसी के पास भी मेडिकल कचरे को लेकर समुचित व्यवस्था नहीं है।
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