अब्दुल्लापुर में सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटवाने पहुंची नगर निगम की टीम को ग्रामीणों ने घेर लिया। नौबत टकराव और पथराव तक की आ गई। करीब पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद टीम को बैरंग लौटना पड़ा।
हालांकि आश्वासन के मुताबिक देर शाम ग्रामीणों ने दीवारों से चार-चार रद्दे ईट उतार दी। नगरायुक्त ने डीएम को मामले की पूरी रिपोर्ट भेज दी है।
नगर निगम के अफसरों के अनुसार अब्दुल्लापुर में खसरा नंबर 970 की एक हजार वर्ग मीटर भूमि पर अखलाक आदि ने चारदीवारी करके कब्जा कर लिया था। कोर्ट में नगर निगम और अखलाक पक्ष के बीच चले मुकदमे में पिछले साल नवंबर माह में निगम के पक्ष में निर्णय हो गया था।
उसी आधार पर सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने के लिए निगम और तहसील की टीम पुलिस फोर्स के साथ सुबह 11 बजे अब्दुल्लापुर स्थित विवादित भूमि पर पहुंची। इससे पहले ही रालोद नेता राममेहर सिंह 40-50 लोगों को साथ लेकर मौके पर दरी डाले बैठे थे।
जैसे ही नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार, अपने साथ लेखपाल और बुलडोजर लेकर कब्जा हटाने पहुंचे तो आरोप है कि रालोद नेता ने लोगों से निगम कर्मचारियों को घेरने, पथराव करने और गोली तक चलाने का एलान कर दिया।
जिस पर अधिकारियों में हड़कंप मच गया। संपत्ति अधिकारी की सूचना पर अपर नगरायुक्त मृत्युंजय यादव, अपर तहसीलदार न्यायिक महेंद्र बहादुर सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने राममेहर सिंह और कब्जा करने वाले परिवार के सदस्यों से वार्ता की।
लेकिन रालोद नेता अवैध कब्जा न हटने देने की चेतावनी देते रहे। करीब पांच घंटे तक हंगामा होता रहा। बाद में प्रशासनिक अधिकारी 12 घंटे के भीतर स्वयं ही कब्जा हटाने के निर्देश देकर लौट गए। इस दौरान महावीर सिंह, हरिप्रकाश, नरेन्द्र खजूरी, योगेंद्र फौजी और अखलाक परिवार के सदस्य मौजूद रहे।