इसके बाद खतौली से उन्हें 2017 में भाजपा ने विधानसभा का टिकट दिया और वह पहली बार विधायक चुने गए। सैनी की सियासी एक्सप्रेस लखनऊ के ट्रैक पर दौड़ी तो उनके बयान और अधिक तीखे हो गए।
ऐसे कई मौके आए, जब खुद भाजपा नेता उनके बयानों के कारण असहज नजर आने लगे थे। किसी तरह पांच साल बीते। सियासी गलियारों में उनका टिकट कटने की खूब चर्चा हुई, लेकिन दूसरी बार भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और वह चुनाव जीत गए।
इसी दौरान 11 अक्तूबर को कवाल के ही झगड़े में अदालत ने उन्हें दो साल की कैद और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जमानत मिलने के कारण विक्रम सैनी को तुरंत राहत तो मिल गई, लेकिन वह अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए।
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