फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Muzaffarnagar: कवाल से चमके थे विक्रम सैनी, बवाल में चली गई कुर्सी, दर्ज हुए थे पांच मुकदमे

Sat, 05 Nov 2022 05:41 PM IST
Dimple Sirohi मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

ऐसे कई मौके आए, जब खुद भाजपा नेता उनके बयानों के कारण असहज नजर आने लगे थे। किसी तरह पांच साल बीते। 11 अक्तूबर को कवाल के ही झगड़े में अदालत ने उन्हें दो साल की कैद  और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जमानत मिलने के कारण विक्रम सैनी को तुरंत राहत तो मिल गई, लेकिन वह अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए। 
विज्ञापन
विधायक विक्रम सैनी - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले भाजपा के खतौली विधायक विक्रम सैनी कानून के पेंच में फंस गए। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद विक्रम सैनी का कद सियासत में खूब बढ़ा था। अपने गांव कवाल से वह चमके और यहीं के बवाल में उन्हें अदालत ने सजा सुना दी, जिस कारण उनकी कुर्सी चली गई। अब उनकी भविष्य की सियासत पर भी संकट है।

विज्ञापन


सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव कवाल के रहने वाले विक्रम सैनी पर मुजफ्फरनगर दंगे में पांच मुकदमे दर्ज किए गए थे। सपा सरकार में रासुका भी लगी और वह लंबे समय तक जेल में भी बंद रहे। दंगे से पहले उनकी पत्नी राजकुमारी देवी गांव की प्रधान रही थीं। सैनी जेल से छूटे तो जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा और जीत गए।

यह भी पढ़ें: Muzafffarnagar:  सूरज हत्याकांड को लेकर परिजनों में रोष, शव के अंतिम संस्कार से किया इनकार, हंगामा

विज्ञापन

इसके बाद खतौली से उन्हें 2017 में भाजपा ने विधानसभा का टिकट दिया और वह पहली बार विधायक चुने गए। सैनी की सियासी एक्सप्रेस लखनऊ के ट्रैक पर दौड़ी तो उनके बयान और अधिक तीखे हो गए।

ऐसे कई मौके आए, जब खुद भाजपा नेता उनके बयानों के कारण असहज नजर आने लगे थे। किसी तरह पांच साल बीते। सियासी गलियारों में उनका टिकट कटने की खूब चर्चा हुई, लेकिन दूसरी बार भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और वह चुनाव जीत गए। 

इसी दौरान  11 अक्तूबर को कवाल के ही झगड़े में अदालत ने उन्हें दो साल की कैद  और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जमानत मिलने के कारण विक्रम सैनी को तुरंत राहत तो मिल गई, लेकिन वह अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए। 

यह भी पढ़ें:स्ट्रीट डॉग की मौत पर आत्महत्या:  घर में पाल रखे थे 10 कुत्ते, अंडे खिला घर से निकली गौरी, फिर उठाया खौफनाक कदम
विज्ञापन

क्या था मामला
सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव कवाल में 29 अगस्त 2013 को दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। हिंसा और आगजनी की घटना के बाद पुलिस ने तब पूर्व प्रधान के पति विक्रम सैनी समेत 28 लोगों के खिलाफ सिखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। विधायक समेत 12 आरोपियों को धमकी देने के मामले में दो-दो साल और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। धारा 148 में दो साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया था।

विधायक पर दर्ज थे पांच मुकदमे
खतौली के भाजपा विधायक विक्रम सैनी पर मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान पांच मुकदमे दर्ज किए गए थे। तीन मामलों में वह दोषमुक्त हो चुके हैं, जबकि 29 अगस्त 2013 के मामले में उन्हें सजा हो गई थी। सैनी के अधिवक्ता भारतवी अहलावत ने बताया कि विक्रम सैनी पर पर 153ए का मुकदमा लंबित है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें