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मुजफ्फरनगर दंगा: अब बढ़ेगी भाजपा सांसद सहित कई बड़े नेताओं की मुश्किलें, होईकोर्ट में होगी सुनवाई

Wed, 26 Sep 2018 08:14 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर दंगा (फाइल फोटो)
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की जनप्रतिनिधियों के लिए गठित विशेष अदालत में सुनवाई से सांसदों और विधायकों की मुश्किलें बढ़ेंगी। पांच साल से जनप्रतिनिधियों के सभी मामले स्थानीय अदालतों में लंबित थे। कई बार कोर्ट में पेश नहीं होने पर नेताओं के खिलाफ एनबीडब्ल्यू वारंट भी जारी हो चुके हैं।

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सात सितंबर 2013 में दंगा भड़का और मुजफ्फरनगर और शामली में 65 से ज्यादा बेगुनाहों की मौत हो गई। हिंसा की आग ने बागपत और मेरठ को भी चपेट में ले लिया था। 50 हजार से ज्यादा लोग गांव छोड़ कर शरणार्थी कैंपों में आने को मजबूर हो गए। धार्मिक उन्माद फैलाने, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने तथा भड़काऊ भाषण देने के जो भी मुकदमे दर्ज किए गए, उनमें भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा के बड़े नेता शामिल हैं। मुख्य मुकदमे खालापार की सभा और नंगला मंदौड़ की पंचायतों के हैं। भाजपा के मौजूदा सांसद डॉ. संजीव बालियान, कुंवर भारतेंद्र सिंह, विधायक उमेश मलिक, विक्रम सैनी, संगीत सोम और विहिप की महिला नेता साध्वी प्राची इन मुकदमों में आरोपी हैं। योगी मंत्रिमंडल में शामिल गन्ना विकास राज्यमंत्री एवं थानाभवन विधायक सुरेश राणा भी दंगे के आरोपी हैं।

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वहीं अन्य पार्टियों में बसपा के पूर्व सांसद कादिर राना, चरथावल के पूर्व विधायक नूर सलीम राना, मीरापुर के पूर्व विधायक जमील अहमद तथा कांग्रेस के पूर्व सांसद सईदुज्जमां आदि वो बड़े सियासी चेहरे हैं, जिन्हें मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट का सफर तय करना होगा। स्थानांतरित किए गए अन्य मुकदमों में बीजेपी एमएलए कपिल देव अग्रवाल पर तीन वाद विचाराधीन है। पूर्व विधायक अशोक कंसल, हाजी इस्लाम, गन्ना समिति मंसूरपुर के पूर्व चेयरमैन श्यामपाल, पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह, जयप्रकाश शास्त्री भैंसी आदि के मुकदमे भी जिला कोर्ट में नहीं सुने जाएंगे। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मुकदमों की त्वरित सुनवाई हो, इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीरता के दंगे के 10 मामलों समेत 35 मुकदमे हाईकोर्ट में चलाए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। 

पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि अदालत के आदेश का हमेशा सम्मान करते हैं और करते रहेंगे।

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