डॉक्टरों का कहना है कि विकास शर्मा ने ढाई लाख रुपये देने का दबाव बनाया था। सुविधा शुल्क की मांग पूरी नहीं करने पर अस्पताल बंद करवाने की चेतावनी आरोपियों ने दी थी। डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री, डीजीपी, डीएम और सीएमओ को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। सिविल लाइन थाने में तहरीर दी गई है।
क्या था मामला
रोनी हरजीपुर निवासी राज सिंह अपनी पत्नी को प्रसव पीड़ा के बाद 18 फरवरी को अस्पताल के लिए लेकर चला था। रास्ते में प्रसव हो गया, जिस कारण नवजात को चोट लग गई। राज सिंह ने अपनी पत्नी को शामली रोड स्थित अस्पताल में भर्ती कराया, जबकि नवजात आरती को पंवार हॉस्टिपल में भर्ती कराया था।
28 फरवरी को राज सिंह की पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद 13 मार्च को राज सिंह नवजात कोा अस्पताल से अपने घर ले गया। 14 मार्च को वह दोबारा अस्पताल पहुंचा और आरोप लगाया कि उसने लडक़ा भर्ती कराया था, जबकि अस्पताल में बच्चा बदलकर लडक़ी दे दी गई। भाकियू के जिला उपाध्यक्ष विकास शर्मा अन्य लोगों के साथ अस्पताल पहुंचे और प्रदर्शन किया था।
डीएनए जांच में लडक़ी हुई साबित
सिटी मजिस्ट्रेट अनूप कुमार के हस्तक्षेप के बाद डीएनए जांच के लिए सहमति बनीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने नवजात और राज सिंह का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा था। आठ अप्रैल को रिपोर्ट आई, जिसमें सैंपल मैच हो गया।