बिन्ते जैनब नकवी और निगहत सैय्यद का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आलिया मामले पर एडवोकेट बिन्ते जैनब नकवी ने बहुत ही मुखर होकर आलिया का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मैं आलिया की प्रतिभा से प्रभावित हूं और उसकी बात का समर्थन करती हूं। इसके साथ ही उन्होंने उलमाओं पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि वह आखिर शरीयत के नाम पर क्या बच्चों और औरतों पर जुल्म की बात करते रहेंगे। उलमाओं का विरोध सीधे-सीधे दूसरे की स्वतंत्रता छीनना है, जिसकी इजाजत हमारा संविधान नहीं देता है। आलिया ने गीता को पढ़ा और उसे सुनाया। उसने श्रीकृष्ण का रूप धारण किया तो इससे कहां धार्मिक पाबंदियां टूट गईं।
वेशभूषा से मजहब खतरे में नहीं
इस्माईल डिग्री कालेज की शिक्षिका निगहत सैय्यद ने आलिया खान के पक्ष में कहा कि आखिर आलिया ने क्या गलत कर दिया। यदि यही सोच रही तो मुस्लिम समाज के बच्चे पढ़ नहीं पाएंगे। क्योंकि समानता का दर्जा पाने के लिए समानता का व्यवहार भी जरूरी है। आज बच्चे कान्वेंट स्कूलों में पढ़ रहे हैं, वहां पर फैंसी ड्रेस शो जैसे आयोजन में भाग लेते हैं। इससे उनका उत्साह बढ़ता है। क्या इससे मजहबी सोच पर कोई असर नहीं आता है। इसलिए उलमाओं और कौम के ठेकेदारों को अब अपनी सोच बदलनी चाहिए। किसी भी वेशभूषा से मजहब खतरे में नहीं पड़ता।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/