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मुन्ना बजरंगी मर्डर केस: अनसुलझी है हत्या की गुत्थी, अब वारदात को लेकर उठे ये बड़े सवाल

Thu, 09 May 2019 02:43 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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बागपत जेल में पूर्वांचल के डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या की गुत्थी अब तक अनसुलझी है। कई सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब पुलिस के पास नहीं है। बर्खास्त जेल वार्डर माधव कुमार के नाम से मुख्य सचिव को भेजे पत्र में वारदात को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। बजरंगी की हत्या सवा छह बजे की गई, जबकि जेल के मुख्य गेट पर अलार्म बजाने का समय गेट कीपर ने छह बजे लिखा है। एकल कक्षों पर सुनील राठी के विश्वसनीय नंबरदार की छह माह तक तैनाती रखी गई। वार्डर ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी, इसके अलावा कई अन्य कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है।

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गाजियाबाद जेल अधीक्षक वधी राम की रिपोर्ट पर मथुरा जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र मैत्रेय ने 23 अप्रैल को जेल वार्डर माधव राम और हेड जेल वार्डर अजेंद्र कुमार को बर्खास्त किया। बर्खास्त जेल वार्डर माधव राम के नाम से मुख्य सचिव को भेजे पत्र में बागपत जेल की अव्यवस्थाओं और हत्या के दिन की कहानी पर कई सवाल उठाए गए हैं।

माधव का कहना है कि वह घटनास्थल से करीब 80 मीटर दूरी पर था। एकल कक्ष की तरफ फायर की आवाज सुनीं तो वह उधर दौड़ा। उसने देखा कि मुन्ना बजरंगी खून से लथपथ पड़ा था, जबकि उस तरफ से सुनील राठी आ रहा था। जेल प्रबंधन, ड्यूटी लगाने और वारदात पर माधव ने कई सवाल उठाते हुए पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधिकारी घटना को आठ जुलाई सुबह सवा छह बजे की बता रहे हैं, लेकिन जेल के गेट पर रखे गए रजिस्टर में ही अलार्म बजाने का समय छह बजे लिखा गया है। माधव ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि जेल में पिस्टल की उपस्थिति के लिए वह दोषी नहीं है। अन्य लोगों की जांच होनी चाहिए।

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वारदात के दिन इस तरह हुई लापरवाही
वारदात के दिन जेल वार्डर पर एकल कक्षों समेत 219 बंदियों की जिम्मेदारी दी थी। इनमें बजरंगी और सुनील राठी जैसे अपराधी भी शामिल थे।
बैरक संख्या एक डी से नरेश राठी अन्य बंदियों के साथ सुनील राठी से मिलने पहुंचा, इसी समय वारदात हुई। इसी क्षेत्र के सीवर टैंक से पिस्टल बरामद हुआ। यहां तैनात कर्मियों की भूमिका पर सवाल।
एकल कक्षों पर सुनील राठी के करीबी बंदी नंबरदार बबलू की ड्यूटी करीब छह माह से थी। जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं हो सकता। बंदी नंबरदार की तैनाती जेल अधीक्षक करते हैं।

जेल वार्डर की भूमिका पर उठाए सवाल
मुख्य सचिव को भेजे पत्र में एक अन्य जेल वार्डर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वार्डर के क्षेत्र में पिस्टल बरामद हुआ । आरोप लगाया कि वार्डर ने बंदियों को सुनील राठी के पास जाने से नहीं रोका, इसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा अधीक्षक, डिप्टी जेलर, दिन जेल वार्डर, रात्रि जेल वार्डर, गेट कीपर, मेन गेट तलाशी ड्यूटी जेल वार्डर, नियुक्त बंदी ओवरसियर, और बंदी बैरक संख्या एक डी के जेल वार्डर की भूमिका की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।

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