वारदात के दिन इस तरह हुई लापरवाही
वारदात के दिन जेल वार्डर पर एकल कक्षों समेत 219 बंदियों की जिम्मेदारी दी थी। इनमें बजरंगी और सुनील राठी जैसे अपराधी भी शामिल थे।
बैरक संख्या एक डी से नरेश राठी अन्य बंदियों के साथ सुनील राठी से मिलने पहुंचा, इसी समय वारदात हुई। इसी क्षेत्र के सीवर टैंक से पिस्टल बरामद हुआ। यहां तैनात कर्मियों की भूमिका पर सवाल।
एकल कक्षों पर सुनील राठी के करीबी बंदी नंबरदार बबलू की ड्यूटी करीब छह माह से थी। जबकि नियमानुसार ऐसा नहीं हो सकता। बंदी नंबरदार की तैनाती जेल अधीक्षक करते हैं।
जेल वार्डर की भूमिका पर उठाए सवाल
मुख्य सचिव को भेजे पत्र में एक अन्य जेल वार्डर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसी वार्डर के क्षेत्र में पिस्टल बरामद हुआ । आरोप लगाया कि वार्डर ने बंदियों को सुनील राठी के पास जाने से नहीं रोका, इसकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा अधीक्षक, डिप्टी जेलर, दिन जेल वार्डर, रात्रि जेल वार्डर, गेट कीपर, मेन गेट तलाशी ड्यूटी जेल वार्डर, नियुक्त बंदी ओवरसियर, और बंदी बैरक संख्या एक डी के जेल वार्डर की भूमिका की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।
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