स्वास्थ्य सेवाओं को बचाने के लिए कर रहे आंदोलन
मेरठ। आईएमए चिकित्सकों का अनशन बुधवार से शुरू हो गया है, जो 12 फरवरी तक चलेगा। चिकित्सकों का कहना है कि यह आंदोलन स्वास्थ्य सेवाओं को बचाने के लिए किया जा रहा है।
आईएमए भवन में शुरू हुए तीन दिवसीय अनशन में चिकित्सकों की 6-6 घंटे की ड्यूटी तय की गई है। लिहाजा ओपीडी और अस्पताल खुले रहे, मरीजों को दिक्कत नहीं हुई। आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनिल कपूर, सचिव डॉ. मनीषा त्यागी, डॉ. एमके बंसल, डॉ. आशु मित्तल, डॉ. अभिषेक मोहन, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. रेणु भगत, डॉ. तनुराज सिरोही, डॉ. वीरोत्तम तोमर और डॉ. उमंग अरोड़ा आदि अनशन पर बैठे। विरोध की वजह आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति मिलना है।
आईएमए सचिव ने कहा कि हमारा विरोध एक चिकित्सक को विभिन्न पद्धतियों से इलाज करने पर है। इससे इलाज की सुरक्षा और गुणवत्ता पर फर्क पड़ेगा।
अनशन पर बैठे अन्य चिकित्सकों ने भी कहा कि यह एक गांधीवादी सिद्धांत पर चलकर सत्याग्रह का तरीका है। आईएमए ने पहले भी आठ और 11 दिसंबर 2020 को पूरे देश में विरोध दर्ज कराया था। सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस नहीं ले रही है।
पूरे देश मे चलेगा अभियान
केंद्रीय आईएमए ने सभी मेंबर्स को पूरे देश में ‘सेव हेल्थ केयर इंडिया मूवमेंट’ शुरू करने का आह्वान किया है। इस ‘मिक्सौपैथी’ के खिलाफ अभियान चलाएगी। आईएमए के चिकित्सकों का दावा है कि इससे आम जनता की सेहत और स्वास्थ्य का नुकसान है। केंद्रीय आईएमए के अध्यक्ष और सचिव इस अवधि में पूरे भारत का दौरा करेंगे। वूमेन डॉक्टर्स विंग और मेडिकल स्टूडेंट नेटवर्क भी इसमें शामिल होंगे।
आज आईएमए की महिला विंग करेगी अनशन
मैक्सोपैथी के विरोध में चल रहे क्रमिक अनशन में बृहस्पतिवार को आईएमए की महिला विंग अनशन करेगी।