बिजली उपभोक्ताओं द्वारा बकाया बिल अदा नहीं करने से पीवीवीएनएल की हालत खराब होती जा रही है। कंपनी के 1.80 लाख उपभोक्ताओं ने एक हजार करोड़ से ज्यादा का बिल दबाया हुआ है। आरसी जारी होने के बाद भी ये बकाया नहीं दे रहे हैं। अब कंपनी ने बकाया वसूली के लिए राजस्व विभाग कर्मियों के साथ अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
भारी घाटे से जूझ रहीं प्रदेश की बिजली कंपनियों को संजीवनी देने के लिए केंद्र सरकार ने उदय योजना के तहत भारी वित्तीय मदद की है। ये मदद बिजली चोरी का ग्राफ 15 फीसदी तक लाने और राजस्व वसूली बेहतर करने की शर्त पर दी गई है। जो भी कंपनी योजना की शर्तों को पूरा नहीं करेगी, मदद रोक दी जाएगी।
पीवीवीएनएल को भी करोड़ों रुपये की वित्तीय मदद मिली है, लेकिन राजस्व वसूली अपेक्षा से कम होने के चलते वित्तीय मदद पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। कंपनी ने उन उपभोक्ताओं से बकाया वसूली की कवायद तेज कर दी है, जिनकी आरसी काटी जा चुकी है।
कंपनी एमडी आशुतोष निरंजन के मुताबिक पश्चिमांचल में ऐसे करीब 1.80 लाख उपभोक्ता हैं। इन पर करीब एक हजार करोड़ रुपया बकाया है। इनसे वसूली के लिए कंपनी के अधिकारी नियुक्त कर दिए हैं। जो बकाया अदा नहीं करेगा, उसके खिलाफ राजस्व विभाग से कार्रवाई की जाएगी। मुरादाबाद में सर्वाधिक बकाएदार हैं। यहां 48,806 आरसी काटी गई है। इन पर 290 करोड़ बकाया है।
मेरठ के उपभोक्ताओं पर बकाया 102 करोड़
मेरठ के करीब 30 हजार उपभोक्ताओं ने भी कंपनी के करीब 102 करोड़ रुपये दबा रखे हैं। इन सभी की आरसी कटी हुई है। बकाएदारों के पास कंपनी का संदेश भी पहुंचाया गया है, लेकिन बहुत कम उपभोक्ता ही कार्रवाई से बचने के लिए बकाया अदा कर रहे हैं।
ये है कंपनी के दबे राजस्व का हाल
जोन बकाएदार बकाया राशि
मेरठ 29531 102
गाजियाबाद 24120 102
बुलंदशहर 24360 101
सहारनपुर 35827 167
नोएडा 14383 103
मुरादाबाद 48806 290
(नोट : धनराशि करोड़ रुपये में है।)
बकाया नहीं देने पर होगी कार्रवाई
कंपनी के करीब पौने दो लाख बकाएदार उपभोक्ताओं की आरसी काटी जा चुकी है। इन उपभोक्ताओं पर करीब एक हजार करोड़ रुपया बकाया है। तहसील प्रशासन को साथ लेकर इन उपभोक्ताओं से वसूली की जाएगी। जो उपभोक्ता बकाया नहीं देगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। -आशुतोष निरंजन, एमडी पीवीवीएनएल मेरठ