इनमें बसपा ने सबसे ज्यादा तीन टिकट मुजफ्फरनगर के नेताओं को दिए हैं। उत्तराखंड की हरिद्वार सीट पर बसपा ने मीरापुर के पूर्व विधायक मौलाना जमील को प्रत्याशी बनाया है। मौलाना जमील बसपा के टिकट पर वर्ष 2012 में विधायक चुने गए थे, इसके बाद वह चुनाव नहीं जीत पाए हैं। इस बार उन्हें बसपा ने हरिद्वार सीट पर मौका दिया है।
पुरकाजी सुरक्षित सीट पर 2022 का चुनाव लड़ चुके एडवोकेट सुरेंद्र सिंह मैनवाल को बसपा ने इस बार सुरक्षित सीट नगीना से चुनाव मैदान में उतार दिया है। मैनवाल को जुझारू प्रत्याशी के तौर पर देखा जा रहा है।
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से भी वह बसपा के टिकट के दावेदारों में शामिल थे। शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलते ही वह नगीना चुनाव लड़ने के लिए पहुंच गए हैं।
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बसपा ने ही गाजियाबाद सीट से मुजफरनगर निवासी नंद किशोर पुंडीर को प्रत्याशी बनाया है। पुंडीर लंबे समय से भाजपा में सक्रिय थे। मूल रूप से शामली के महावतपुर गांव के रहने वाले नंद किशोर पुंडीर ने भाजपा से टिकट की दावेदारी की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अब वह बसपा के टिकट पर गाजियाबाद सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
सियासी मुकाबले दिलचस्प मोड पर भी पहुंच रहे हैं। बसपा ने गाजियाबाद से नंद किशोर पुंडीर को प्रत्याशी बनाया है, जबकि उनकी पत्नी कविता पुंडीर मुजफ्फरनगर सीट पर राष्ट्रवादी जनलोक सेवक पार्टी सत्य की उम्मीदवार हैं। अलग-अलग पार्टी से पति-पत्नी चुनाव के मैदान में है।
निरस्त हो गया था नंद किशोर का नामांकन
भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद नंद किशोर पुंडीर ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन किया था, लेकिन जांच में उनका नामांकन निरस्त हो गया। इसके बाद वह बसपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में आए और गाजियाबाद सीट से टिकट की दावेदारी की। उन्हें टिकट मिल गया है।
बिजनौर सीट पर चंदन चौहान प्रत्याशी
बिजनौर लोकसभा सीट का बड़ा हिस्सा मुजफ्फरनगर जिले का है। पुरकाजी सुरक्षित और मीरापुर विधानसभा सीट बिजनौर लोकसभा में आती है। मीरापुर से रालोद के विधायक चंदन चौहान भी बिजनौर लोकसभा से रालोद-भाजपा गठबंधन के प्रत्याशी हैं।