भक्तांबर विधान पाठ में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगम्बर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान का 42वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगम्बर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान का 42वां दिन मनाया गया। यह विधान विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर गुरुवर भाव भूषण महाराज ने मानसिक शक्ति के महत्व पर अपने मंगल प्रवचन दिए।
विधान का शुभारंभ विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से किया। स्वर्ण कलश से अभिषेक का सौभाग्य मयंक जैन, अर्पित जैन, सम्यक जैन और मिलेन्द्र मेहता को प्राप्त हुआ। आज की शांतिधारा आशीष जैन, रिषित जैन और युवान जैन ने की। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप का प्रज्वलन सोनल मेहता और उषा जैन ने किया। बा.ब्र. सुनीता दीदी ने विश्व के सभी जीव सुखी रहें ऐसी मंगल भावना व्यक्त की। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाए गए। भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ जिसमें 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। यह अर्घ्य विधान कराने वाले सभी धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए थे। आज 151 परिवारों की ओर से इस विधान का आयोजन कराया गया। महाराज भाव भूषण ने अपने प्रवचन में मानसिक शक्ति पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में आर्थिक हानि उतनी महत्त्वपूर्ण नहीं होती। मानसिक शक्ति का बने रहना अधिक आवश्यक है। व्यक्ति के भीतर यदि उत्साह, आत्मबल और सकारात्मक सोच जीवित है तो वह किसी भी परिस्थिति से उबरकर पुनः ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।
सफलता के लिए आवश्यक गुण
महाराज ने बताया कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जो व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत रहता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता। यदि मन का उल्लास समाप्त हो जाए या मानसिक शक्ति कमजोर पड़ जाए, तो व्यक्ति को नीचे आने में देर नहीं लगती। जीवन में सफलता के लिए आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच अत्यंत आवश्यक हैं।
भक्तांबर विधान पाठ में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद