उन्होंने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से कोऑपरेटिव को खड़ा किया जा रहा है। इसके लिए जायका के नाम से एक लोन योजना शुरू हुई है, जिसमें भारत सरकार को 16 सौ करोड़ रुपए का बजट मिला है। इसमें जापान का बड़ा सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना को उत्तर प्रदेश और बिहार में चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ा रहा है, ताकि किसानों को दुग्ध उत्पादन में अधिक से अधिक लाभ दिलाया जा सके।
उन्होंने पराग का नाम लेते हुए कहा कि हमारे उत्तर प्रदेश में पराग की शुरुआत की गई थी लेकिन अब वह ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि अब मिल्क कोऑपरेटिव बनाई जा रही हैं। इन संस्थाओं से जुड़े किसानों का दूध इकट्ठा करके मदर डेयरी को दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का सदस्य पशुपालक यानी किसान भी होगा। उससे होने वाली आय का सीधा लाभ किसान को पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि हरित प्रदेश संस्था फिलहाल पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, शामली, मेरठ, बिजनौर, हापुड़ और सहारनपुर में काम कर रही है। इन 7 जिलों से लगभग 15 से गांव के किसानों से 1.35 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा रहा है।
कहा कि अधिक से अधिक किसान जुड़ने के बाद एक समय आएगा कि यह संस्थाएं स्थानीय स्तर पर अपने कारखाने भी लगाएंगी, जहां पर मिल्क प्रोडक्ट यानी दूध के साथ दही आइसक्रीम आदि भी बनाने का काम करेंगे। एनडीडीबी डेरी सर्विस ने देशभर के राजस्थान गुजरात आंध्र प्रदेश पंजाब मध्य प्रदेश बिहार और उत्तर प्रदेश में किसानों के स्वामित्व वाली 19 संस्थाएं बनाई है। जिनमें एक संस्था हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी भी है।
इस संस्था ने उत्तर प्रदेश के बनारस अमेठी बुंदेलखंड और मेरठ के क्षेत्रों में काम शुरू कर दिया है। एक दिन यह संस्था मदर डेयरी से भी बड़ी दिखाई देगी। इस संस्था का सदस्य बनने के लिए किसान को 100 रुपये में 5 शेयर खरीदने होंगे। कार्यक्रम के दौरान डेयरी विकास बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मीनेश शाह भी उपस्थित रहे।