विचाराधीन-सजायाफ्ता के अलग नियम
हाई पावर कमेटी की ओर से जारी की गई गाइडलाइन के अनुसार विचाराधीन बंदियों और सजायाफ्ता कैदियों के लिए अलग-अलग नियम निर्धारित हैं। विचाराधीन बंदी न्यायालय के आदेश पर दो माह की अंतरिम जमानत पर छोड़े जाएंगे।
इसमें ऐसे बंदियों को चिन्हित किया गया है जिन्हें अधिकतम सजा सात साल की हो सकती हो, जबकि सजायाफ्ता कैदियों को शासन के आदेश पर दो महीने की पैरोल मिलेगी। इसमें ऐसे बंदी चिन्हित किए जा चुके हैं, जिन्हें सात साल तक की सजा हुई हो। इसके अलावा ऐसे बंदी भी चिन्हित किए गए हैं, जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक हो। भले ही सजा के लिहाज से उन्हें कितनी लंबी ही सजा क्यों ना हुई हो।
हाई पावर कमेटी की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार विवरण तैयार कर लिया गया है। जनपद में 250 विचाराधीन और 70 सजायाफ्ता इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं। विचाराधीन बंदी की प्रक्रिया आज से शुरु होगी। जबकि सजायाफ्ता की प्रक्रिया शासन से अनुमति मिलने के बाद। - डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक