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बेबस है बेटा: पिता की बंदूक बचाने के लिए जद्दोजहद, पर नहीं टूट रही अफसरों की नींद, हर बार अटक जाती है फाइल

Sat, 03 Jun 2023 01:38 PM IST
कपिल kapil मोहित कुमार, संवाद न्यूज एसेंजी, मोदीपुरम, मेरठ

सार

Meerut News : पिता की बंदूक बचाने के लिए बेटा जद्दोजहद कर रहा है। लेकिन अभी तक अफसरों की नींद नहीं टूटी है। बताया गया कि हर बार फाइल अटक जाती है।
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हर्ष चौधरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिता की मौत के बाद बंदूक का लाइसेंस अपने नाम करवाने के लिए एक बेटा जद्दोजहद कर रहा है, लेकिन तीन बार आवेदन करने के बाद भी हर बार निराशा ही हाथ लगी। आलम यह है कि वह बंदूक की कीमत से ज्यादा गन हाऊस मालिक को किराया दे चुका है।

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मेरठ के सिवाया गांव निवासी स्व. दारा सिंह ठेकेदारी का कार्य करते थे। उनके इकलौते बेटे हर्ष चौधरी ने बताया कि वह गुडगांव में एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। उसके पिता दारा सिंह ने सन 2005 में बंदूक का लाइसेंस बनवाया और 15 हजार रुपये में बंदूक खरीदी थी।

वहीं, 2019 में पिता की मृत्यु के बाद पीएल शर्मा रोड स्थित एक गन हाऊस में बंदूक को देख-रेख के लिए किराये पर रख दिया। तब बंदूक रखने का साल भर का किराया पांच हजार रुपये था। 2023 में किराया बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया गया। अब, तक वह बंदूक का 25 हजार रुपये किराया दे चुका है।
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तीन बार किया आवेदन, हर बार फाइल हुई वापस
हर्ष चौधरी ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उसने वारिसान के तहत लाइसेंस अपने नाम करवाने के लिए तीन बार फाइल लगाई, लेकिन तीनों बार लाइसेंस उसके नाम नहीं हो सका। हर बार फाइल वापस कर दी गई। हर्ष के मुताबिक, उसने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उसे लाइसेंस अपने नाम होने का यकीन है। जल्द ही वह चौथी बार आवेदन करेगा। 

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हर्ष के मुताबिक, उनके पिता सरधना विधानसभा से तीन बार विधायक रहे स्व. रविंद्र पुंडीर के बेहद करीबी थी। पूर्व विधायक की सिफारिश पर ही उनके पिता को लाइसेंस मिला था। जिसके बाद यह बंदूक खरीदी थी। पिता को अपनी बंदूक बहुत प्यारी थी। पिता की यह आखिरी निशानी है। जिसे, वह हर हाल में बचाकर रहेंगे।
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