सेटेलाइट से प्रदूषण की निगरानी शिकंजा कसेगा प्रशासन
शहर का प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। एक्यूआई 262 पार हो गया है। इसके चलते पराली जलाने या शहर को प्रदूषित करने वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा सेटेलाइट से निगरानी के बाद धुआं उठने वाले स्थान की ऑनलाइन लोकेशन जिला प्रशासन को बताई जा रही है।
सोमवार को पहले दिन सेटेलाइट द्वारा धुएं की लोकेशन पर पचगांव पट्टी गांव में लेखपाल व कानूनगो पहुंचे। जहां तालाब के किनारे कूड़ा जलता पाया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पराली जलाने वाले किसान पर जुर्माना लगाया जाएगा। जिसको लेकर जिला प्रशासन ने एक टीम गठित की है।
दो दिन पहले मेरठ देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया था। धान की फसल की कटाई चल रही है। जिसके चलते किसानों द्वारा पराली जलने से हवा की सेहत और भी खराब हो सकती है।
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पहले दिन कूड़ा जलाने पर पचगांव पट्टी गांव पहुंचे लेखपाल व कानूनगो
सेटेलाइट की लोकेशन पर लेखपाल को मौके पर भेजा जा रहा है। प्रशासन द्वारा लगातार गांव-गांव में किसानों को पराली ने जलाने के लिए जागरुक किया जा रहा है। पराली की खेत में जुताई कराई जाए या फिर दवाई का छिड़काव कराने गलाया जाए। इससे प्रदूषण नहीं फैलेगा और फसल भी अच्छी होगी। - शैलेंद्र कुमार, तहसीलदार सदर
शहर में बेगमपुल सबसे प्रदूषित
दो दिन पहले मेरठ का एक्यूआई 262 और मुजफ्फरनगर 260 और शामली 255, चौथे नंबर पर ग्रेटर नोएडा 248 था। देश के 223 शहरों की सूची में मेरठ पहले स्थान पर पहुंच गया था। शहर में जयभीमनगर 250, गंगानगर 244, पल्लवपुरम 256, बेगमपुल 258 व दिल्ली रोड 249 दर्ज किया गया। बागपत 200, गाजियाबाद 214, मुजफ्फरनगर 260, शामली 255, हापुड 250, नोएडा 208, ग्रेटर नोएडा 248 पाया गया है।