देश में चीनी के बंपर उत्पादन को संतुलित करने और किसानों के बढ़ते गन्ना बकाया भुगतान से चिंतित सरकार की गन्ना रस और बी हैवी शीरे से एथनॉल बनाने की नीति रंग लाने लगी है। एथनॉल उत्पादन करने वाली मिलों को एथनॉल के साथ चीनी उत्पादन करने पर प्रति क्विंटल गन्ने से करीब 60 रुपये का फायदा हो रहा है। मंडल की बृजनाथपुर शुगर मिल अब तक डेढ़ लाख लीटर एथनॉल की बिक्री इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को कर चुकी है। साबितगढ़ मिल में एथनॉल प्लांट का कार्य जारी है।
यह है स्थिति
देश में लगातार बढ़ रहे गन्ना रकबे और अच्छी उपज के चलते चीनी का उत्पादन लगातार सरप्लस हो रहा है। पिछले साल 315 लाख टन पहुंचा देश में चीनी का उत्पादन इस साल भी 300 टन से ऊपर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जरूरत और एक्सपोर्ट के बाद भी 50 हजार टन से ज्यादा चीनी का स्टॉक लगातार बच रहा है। चीनी की बिक्री नहीं होने के चलते शुगर मिलें किसानों का गन्ना बकाया भुगतान भी नहीं कर पा रही है। देश में वर्तमान पेराई सत्र का 20 हजार करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसमें यूपी का 10 हजार करोड़ रुपये बकाया है। मेरठ मंडल की मिलों पर भी 1324 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। सरकार ने देश में चीनी उत्पादन का संतुलन बनाने के लिए गन्ने के रस से एथनॉल उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए सरकार ने नीति में परिवर्तन के साथ ही पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण की प्रतिशतता बढ़ाई है।